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दिना तिमोदी जेहनी इच्छा असंतोष लो जयस्त्र । लोल इंस्पा । तथा दद्दर बच्चीलका | दर्दरक १५० हतांगलदईरपतलाई स्पने घावना टोय बोलिवानाम्बरतेगा। स्वरूपगोपवत तेन इलजार दिनकर एतावता का ईधनी तिदां तिही आपणा पवंगे, पवईचार की बाहनागलिएहवने वचननामंबर करजे । इते इमजा पाई एको मोटरुषपरोपकारी परधन तिलाषी नमी इमजागी आपणपन प्रकट करें। दिषाडशतिवारात तेव्हा पडा न धनमुस)ल्प एवा पुरुषवारीनाक राहारजाणिवा तम्रा गढिया कहती गृहक परधनविषश्लोलुपतिघातिमरा कद तासा मुदा घई परन भारतलिमरक दि यतघातं जब कहती कशा लाज इं। लेईन पाह नही चोर इजा तघालय में भिया कहतां जेबोल बांददेई वश्वाचा घक चूक तेव्हवाज जाणिवा (तथा राय का कहतीज़ राज डुष्टलमा रफोडी राजोन भूने दर । इत्यादिककर्म कारक तथा विमय तिढा कहती राजा पर ६०