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________________ || बीमारी की मनमो वे एक के रेललाई कर दे किलिक्स असमाहिंच वेईए तो असे ताई 3 / एगंडस६५ नामि|एगंबि४६ लरक एंग एगो ब्जी एस कारण थकीन्समासा बीते लहरीपुरानी तालिवेदे एजीव पिलाने कानकिरंवार समलिगाला लोंग एक कोई बलद पंथ कीनेच मार्ग 1 एक को इननदनमिका नै विषे अनेक कोलमकारकचोकले कान तेजाज पासा जर थुनेय में बलद विजाइनल कटयें रजनीनें अंतिसमिलं एगो उपगोपासेलं निविसेइनि । कुछ फिड एकेक ने एक बलमाया नी ने माथा एक केके जाई प्रतिदिनी एकेकयाना लष्टाहरी बलको जे सजैमार कोई बना देते नरिइयमें भूमिनेदिषु। ब्लें क्षेत्र की त लीजा सहिततिम रतन सढे बाजगवावयमा मुल कुहियां प्रच्लरक एचिहाईवे गेल जाइ जिमबी को इष्टजातिनो बलद बैदेसि एकेक नदी ननद आकरी तक रहने प्रेरण करायला ७ जमिनलादिक भी राजदेक मीरासिसरा स्वामीलीले नै वेगली नासीनजाई दोरही एवा बिनाले बिंद सिो ऽतनं अईयुग सेवासुस आता सुदित्ताय लाई ७ एबल जीउपमार्ग नै माग प्रेरणाकी आपास्वामीने अगुरूने र्गाचार्य शिष्यादिरों से तेगला यारो अविनीतमा हाते वागली आरसरी पाथका जो थकापीया धर्मरूप क्रियानोशनथकीयाचार ग लानें विषे नाति शिष्य गजैचित्तनानिबलथकाशिष्य के ऊशिष्य खेजुको रिसाङजा | उसी साबिता रिसा धमाल मिम अतिथिं छला इही गारवना पुरणहार जेमा ट्राश्रावक एव न करता एकेक शिष्य सातागार थकाविहार एकेक शिष्य निकायको ला एकेक शिष्युमान न न न देता इत्यादिकक शिष्परस करता था के शिष्यकारिकाला कावळा की। आकारुतोजनें गारविएगेत्य रस गारवे । साच्या गार दिए एगे एगे सुचिर को रुतिरकाल सिएएमे (एंगे माल एकना नही नावा
SR No.650033
Book TitleLokashaha ki Hundi
Original Sutra AuthorN/A
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages424
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript
File Size200 MB
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