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________________ पूछे जतिहाँ नाजे/अनोपति धिका maलिहियायत व जासा उवणिहिया साठय्याएं आसार रेगे। वणि साहु-बेफाकारपणा ते ते कहो. नीगम व्यवहारनय से संग्रहनयन (स-ते किं- (ए-नागम यब गररनय कोणा नरमतर बनमन रमतर वहां जाने उ.उपाधिका सा तेद स्थापना हियायामादु विहायतामवचाराएं से गहराया स किं तेोगमव्वहार एते ते समय द्रव्य था. श्रानुश जावत असं पाता समय नी स्थिति सीधिति नाजेंद्र यात नाजेंद्र महारान धारण . तिमन पे - पांचप्रकार जावते ताह पंचविला जावति समयरिईएमबी जावा स्त्री. श्री पूर्व (रा. एक, सम यनी) स्थिति नाथ, यात्रा सुरु/दु-मयनी स्थितिनां त्र-श्रवत त्रिरिम समयन समय सायात ख म टीएम समयति ईए आई। इसमय दिईएन हूँ निस ॥५६॥
SR No.650032
Book TitleAnuyogadwara Sutra
Original Sutra AuthorAryarakshit
Author
PublisherSujalpur
Publication Year1851
Total Pages412
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size168 MB
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