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________________ नानाप्रका त इंडियन हिरका महानादवाला विषादहिया कर्मकादिति हारि कुंडई की घडीला दिदी माना जाना प्रकार नीमाला मलय सहित का कल्याण कारीयां a वि४२ दाता खराबीटी दिदीप मानलेला प्रकार नादाधना श्रातम हिरणहार कल्याणकारीप्र म सुनिए मदारिकाप्रसु महाास मदा बालमु महाज्ञान महामुखख तपतादानवति महि हियां जामदारका हानचिरा वाडवडिय प्रतियंतुया गयऊडलमडगडतलक मीटरी विचित्रद डाक amazaa दिया का परमा शिववाणं शिवएं arit दिद्यापही दिवानी दिनापदि दिवाया लसाए दस दिवमाषारुना तिला वितिक सिलदायाविज्ञवेनिया सरकपदी नाग तसमासादाचा सरकस्म विलापमा दिएवास्मीति स्वादवाला कनविषादयोग दिव्यमपि दिव्यवलिदिव्यधिदित्यफरिसिंदि संघात निदिव्य सेवा निदिरिद्विदिव्यकतिदि व्यप्रतादिव्यादिवचिदिव्यानि दिवापलिसाए दिव्य व्यापारीसहित दस दिसाए० पूर्वादिकयादिना ईशाना दिकविदिशातल श्रादिनश्रादिना एवं दिशिनई अवाकरता समारदसदिशिन करताना तिदिव कशान चितिकरण स्वितिकृष्ट मध्यम कलमाभूमी या कालाव दानधर्मनाथ डिजाइन धानकन्यार्य जाव सर्व रकही मार्गीएको सिम्पसाचा साक्षश्रेष्ट बीजा धानक धनगविलागविचारक के मिश्रन विलग स्वरूपका ॥ ॥ लता दिवस नाया प्रतिदि
SR No.650027
Book TitleSuyagadanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorLalchand
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1645
Total Pages170
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_sutrakritang
File Size88 MB
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