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________________ नाव कचातू इति। उन्माद । तिमोहजन्पन्मदिनी आप क्षीरस्तव विदतर शिव सुख करवाए तमामोहजन्योन्मादवशः प्राणिनाऽविष्टानं यावत्राः॥ माग जस्तत्यादिः तत्र मोहनीयं तस्यातू उन्मादोन वति। यतः तत् उदयवत्रा चेतमान्पतितत्र पिवात चे चारित्र माहनीयं वा यतः तत् उदायजीन तंत्र पिविषयादीनां स्वरुप ज्ञान चारित्रमोहनी यस्प इतरापेक्षयाः ख विमोचनतराजयति कोनांत स्पा साध्यचा वसुद शिमायण तशाचे व तिचणं जाम माणिक म्मम्म उड। स्वतीनामनः वनांनातिदावणारा देव । इह रिमा यांतराचेवानर विथाणसांत कति विदेद्यम्मा दिनाना गादि उदयेनावशेष बिउन्मत्त यवनवति उम्मा दिन्नाता तो जरका दासर्यामादणि अम्मयकम्मम्म पण माणगांना घशान दादाभिन्द त्रमात्रेणापितस्य रतिया शिदम्मा दियो अरका (सर्या माण again | दादा सालाले २०५२ दानी में हा शात्रा परिकावासीत सिंखला पाला सरन हजार४दा | सर्वमंत्र वाद मादकमवा कम्मम्म अदगण (माद॥ पियस्पन सर्व स्प ६० उन्माद तयाणईएम र ऐति • मोहजन उन्मा परिकारका पमम्मा देया गम्मा पाऊसात नियहेश रुः मिट जम्मादिरमाराणां तक विशिद म्मादपत्रात परंशदेवनेश तिथानददे मोहोत्मादः सके विद्याममहि हियतरा अलायाझलपारिकाव झांसगात सिंचना गोपा अलाप रिकव त किन क ध्पनी या परका एम उम्मदेपा वणिकामादजिम्मा मेसंतेचेव (सातमा इजाद एवं विदनतापक्षया पियकमा गवि का श्याम मानव सिंदानर दिया गया एमंतराजा तिम' उखाबदनत रोज वमापियादा खरकमारा। अविशनात पण कालवासी बुद्विकार्येण कार तिहिता अहिर कारणचातू। संसा |||जने • मे घ ॥ कालवासी • वर्षाका लिवर स शतकाल वासी॥ म्रवापर्यन्यत्रादि । इंक दिय दतरापक्ष या दुख अनंतरं संसा रस्पव 5 खविदन स्वभावचाश्नर सुरवावदन an
SR No.650016
Book TitleBhagavati Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
Author
PublisherZZZ Unknown
Publication Year1539
Total Pages1168
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size575 MB
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