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मलाई बाकी नई साधुध्यान साधुधर्मरूपी इंचारामिवनि चालई । वलीमाधुसंतोष श्रनधर्मता श्वशविनादार है। धर्म नव श्राम जितेंद्रिय व्रह्मनि विषसमाधि त्राणामिधाविधिराणि दागा ॥२४॥ धम्माशामचार निरका धिमधम्म मार दी। धमोरारम रदाता बेला चर समा वंत १५ वली साधन शेवदानव गंधर्व डा राक्षस किंनर किंपुरुषइत्पादिक ब्रह्मचारीडः कर खतधारक प्रतिद्धं नमसकर ७६ एवह्मकूपधर्म दिया। श्यादिर्वेदा गवगंधचा । ऊरकर रक स्म किंनरा बेल या रिंनमं संतिऽक्क रोजर क रिंतित। | १६|| एसधाम्म धावनि निश्चलनित्यशास्त्रड्तिताषितवत्र गाइबसचर्य जी दशधा हिवकांसीकसि रसिबोलिनं १ इतिश्रीबसचेर समादिश्यां टबाई मंर
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सास ए डिगाद सिया सिद्धासिनं तिचा एां । सिशिमं
सः। ॥ २६ एर्दा डिम को जीवदी व्याप्राप्त धर्म सांलली नई विन
तिदावार शिवम||२७|| इतिद्वंनचेरस माहिशय
यसहित पुलधर्महीन सम्पकत्रयांमी नई नईपबजे
।। २६६॥
इनियंशव। धमं सुणिला
(Padaam) सुनसंलहिमाबाहिलात विह यघासु विधिचरते माधुक हाइ॥ वलीमा दात्माराम क द जे मादरशि य्यानपावर७टवाना दिरहितबनमादरगर बन सनयानलाई सहिस्सारमा हिवर्तिते सर्व जाण । रिपछायदासुदेवा]]][मिद्याददाश मिलाया जाएगामिवामासा लग वेन श्राकपा संयुक वामन सि वललिदाका लेई नऊ महात्मा तिहिंडिग निद्रा तत्पर वापस तेपायश्रमण की निशा कि नाम का हामि शोक छ। निद्दासीलिया मामा) उद्या विद्यासु हंसुदी यादसमशशि वलीनःश्राचार्ययाध्यायेशा खनई विनयम इया। तेन मूर्ख बजे हनी निंदा करणं तेपायश्रमण बोलई वलीले श्राचार्ययाध्या बुद्दी| || श्रायरियांगहि । सुयं वियं च गा दिए। [ताचच रवं सश्बाला पावसमरणत्रि बुधई || ४|श्रायतिचा
सिनाबालतेयाश्रमण कही
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