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________________ याचा रंग० घर | मेयं विमोहाय तप दिव्याख्या पूर्ववत्र जां शिवी तंविमादाययणं दितं | मुहं | स्वयं णिस्स से | आएगामियं । तिन मि|| इति श्री विमोका ध्यान प्रशाशकः॥६॥॥॥॥ तथाचली शीतपरीस | वा एमित्रा दस दिस्पथिकी ने पुरख पजे ते सदीमक । निवासियऊ इकदै मोदिका कार्य करियान जे सावधान था इसे हट परिमतेन किंचन मात्र प्रतितास ॥ बइ ॥ ह॥ जे चारित्री प्रतिमाप्रतियन्ता सियद विशे बर अलवस्त्ररहिताय ॥ इतिश्रीविमोक्षाध्मयने मष्टो उद्देशक समाप्तः ॥६॥ दिवसात 35 देस प्रारं स येते ॥ देश एकत्व साधनामा लाकर नई ई गितमरणक छं दिवई एाइ उद्देस प्रतिमाविशेषवारित्रयामा कटीय॥ 2/4/9 [[जलिषु | श्राचाल | परिवुमिते| तस्सगं लिषु स्म एवं सवति | चार मित्र दंतगफासे |दियासित्रय सीयफा संदि) | दंशमशकादिकमउ परी सदिया | रक्तस्त्रानुकूल / अल० प्रतिकूल | विद्रूप नानाप्रकार परी सदनाव आदि यासी उल्लपरी सद॥ यदियाम॥ A5 सक या सित्रात उफा संदियासित्रए | दंसमस गया संदियासित्र र एगतार किं दिवि० ले जाकरी/ रमवियासी मसकउ । ज९६७ प्रदेश ढां वसायऊपज तार सालमा पिकवर्ड मंडल अधिक हस्तप्रमा तोतसाधन कम वोलप वृकते रिवाकल्पइते जीपक टिम तथा गणनाइ एक इज बीजन ही हि कारण हिरवे ॥ कारणमीमा अचे उपलक्वि ६१ ऋए| दिरिपरिञ्चादांच |[रमा संचार मि दिया सित्त्रए | एवास कप्पति कम्बिंधांधारित्रए | वात | परमं तेलु E विरुवा फारस दयासि जानऊपन र उद्भवस्त्र भी प्रचि ७० लजानकार तिवस्त्रधरे वाs विचरर । इम विवरती ते हम इवली ॥
SR No.650010
Book TitleAcharanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorMayachand Matthen
PublisherVikramnagar
Publication Year1736
Total Pages146
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_acharang
File Size75 MB
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