SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 74
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ उपासग 39 बरो बरि | बे चंचल चपलजी सबई}} धरती नई विषमाधानी वेणि|| प्रचदीर्घ चा व्यामिति।। धरलीतन समान ] अलडि वेणीलयंडफुडकलिङि लोहना या गर ते दनीधमलिनीपरि फुंकार श्मे न तो माहाऽष्टको थुई स्प ं जिहां कांम लक्ककसनियडफुडा डोकरण दिवं लोहागर धमाधम निघो जेद नोरोस निवारो न जाइप वन । सर्प नोरूप विऊद्दीन |] जिहांपोषधसाला ऋणागलियति द्वेवंडरोस सप्पस वंदिनइतिश्ता / जेणेव पोस हसाला / जेणेव देव श्रावक | तिदां यावादी न | | कामदेव ॥ श्रावकतई || इमबोसो | कामदेवे सम गोवा सरते व वागतिकामदेवंसमणो वासयं पचंवया हे कामदेव श्रावक । पोसो लागी मनही तोते । । श्राज || ॐ || ताड्री काया ३ सीसो कामदेवासमो वासया / जावन संजसि तो ते यद्येव यदं । सरमस्स जमलजुगल चंचलजी धरणीय देली वजं ।
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy