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ज्ञान ) ऊपन। पूर्वश्लव समुश्न विष ५०० पाचसइओयण केवमान ५०० जाण णाणे समुपने पुरनिमालवण समुद्दे पचंजोयणसश्य रिक्त जाणति पासमा इमऊदहाणदिसह मऊपश्चम नतरदिसि लघुहेमवंता पर्वतलगिजाणि। दिषज्ञ 1400३.५०० पासति एवंदविणणपबिामणानतरण जावचुन्न हिमवतावासहरपचय
या देष रितलित्तर केवलागि उत्तरदिसिध्देषः | "राज उटप्रमाण अहे. हे पहिला जाणतिपासतिीन जावासाहम्मकणाणतियासतिअहे आश्मासेर रन प्रत्तानामा एघवालगि लोल यानरकावासालगा। जिलाधाचुरासा हमारवरसना आयुषाना यणप्पत्ताएटवानोलयच्चुयानरयोचनरासातिवाससहस्साहितायजा जाणदेव तेणिकालिनणसम प्रमण धान गवतामा महावार समोसस्या गतियासतिपपीतेकालेणेतेण समासमणेत्तगर्वमहावारेसमोस
स्वित