SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 31
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ तेह प्रतिमहितुं । | श्री. पहिलं प लिबो से आलाप संलाप । तेरुन इन्पाणी देखें नही घोमावार लाचुन हा धर्म बुधि। नकरुधर्म बुधि। सूष की तंबोला धा बोखे नहीं। 53घवा पुचिणालिते चालवित्त वा संलवित्तएवा ते गांव दानवा प वारशर धर्म बुधि अन्यत्र | राजानइ गणसमदीयना । कोइक बलवंत । दिवतानापरवसिया माता || देननहा नकलप मुकनातिनग विनाशयत्तिनुगविना नलिनुमा टि मिता | दानवान्नञ्च राया तिन गांगला जिनगेगा। बलातिनगेगा देव यात्तिन गेणं गुरु तघा चैत्य साधुना वि· वी तथा कालि। मुऊनइकल पियाज | प्रासुक] एषणीक ४रदोषरहित अन उपसर्ग हालवा देव पनि श्रम निघा सर्व निग्रहणं वित्ती केतारे कप मिस मणे नियेधे का खुए षमा मनवास एस सिस पाणी | [षादिमसू | स्वादिम। वखापात्र | | कोबला | पा. पुढं पाथरवानु || पाटिलाफ पाटीचा | पाषा में साइमेवचापडि ग्रहाकबला पायपीट | फलगा से डिमिरा ग्रादि । विहरावनुष्ठि कविचरुं । धर्म पालु करा हरूकोम सहते सजेगा| पडिला से माणसा विहरतए तिक हुई में श्यारु करानइ नोहर | सिज्या संघाला पाटि ल। जाय संघार
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy