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________________ जिदामदास तक ) श्रावक मस्तक ना के सचुटा करीम माधालु | जहां पोषधसाना | गुड ती उत्तरिकिय विकरमाली २ | जेणेव पोसद साला ए| जेणे व मादा सयए समणो []] तिहां | आवीन | मोह उन्माद उपजावलदार काम पूर्ववत् । इम कदिवा लाग| तिमजर्ववत् दीपक कारी यांवचन वासपतेव जवागञ्चतिर मोडमा जाएगा इं| जाव एवं वयासी | तदेवजाव बेदार त्रिवार || एकद्धिं । | से || महा सनक || || श्रावक ॥ धर्मनाकामीमुरु ॥ नोग सो गदतो नह दोचंपितचंपि एवं दयामी) दंतो मदामय्या समणो वासया | धम्मकामया विचरतो कि स्पृधर्मा तिवारी तेम हा सतक | श्रावक | रेवती गाथा पति नुक्चन | बे । जावनो विहरसि तरसेम दासय समलो वा सप रेवगा हा वाण दो वार त्रिवार | इममूर्ववत् कुदुसमाज्ञानमुंजो अवधिज्ञान देषी नहं । कूकरमधम्मो चेपि तचेपि एवं वुत्ते समारच्या सुरू ते जड़िउ जई उहाच्या तो ए 1975 उपासग र एस
SR No.650006
Book TitleUpasakadasanga Sutra
Original Sutra AuthorSudharmaswami
AuthorSomji Rishi
PublisherSurat
Publication Year1783
Total Pages202
LanguagePrakrit
ClassificationManuscript & agam_upasakdasha
File Size29 MB
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