________________
| मुऊन एकरत्ति | गंध इव्यनुं चूकी। तथा गंऊंला चूरा मोकलने । " बाकी वाकडे गटानु नब एगे सुरत्तिणा गंध वह | मण स्नानना विधिनुं | परिमाण कर बइ | तरंच मण विहिपरिमाणं करेशन न स्नान करुं बाकी पाणी तलावन दी सरोवरे । तिवारी व मिचखाप
नषेध |
अवसे समज विहिंपञ्चरका मिति दाश तरंच
| पच खाण|१४|| तिवारपा वसेसे न वाण विहिंपच रकात याएं। [नकलप | चाह८ ] नष्टिका मोटा मानाघमा पाइंस या मौ कला | देसताषांचाली आाघ का ते हि नगस घडे हि
हि समस्तनी संष्पा करिबिइ || न०
नकलप मुऊन कपीस रही सामान्य वानां वस्त्र
नवे केरको म युगले
विलेपण ना संध्या करिबिइ।
व विहिंपरिमाणं करेतिन रवणिन वनुं पचषाण एतलिऊंन | तिवारपढी वली बीऊंना म|| | बाकी । निहारादि कुनही १६ । यवसेस व विहिं पञ्चरका ति तदा तरंच एं विले | बाहुं सर्वनषेध | केसरर | सूकादिमोक। बाकी शेषा ला। कता
अगर१]
व विहिं परिमा करेनन्नरुक्त माचंद मा दिए हिंव से सं