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उपास
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वीत्तवी नई )] उठ) उहीन | | श्रमण सगवंत माहावीरनई | वांदी ] नमस्कार करीनें / इमक हिउँ संपेदितिर उसाहिति२) समां सगर्वमदा वीरं वंदति न सतिश पवंदया ॥ इमनिश्वई हे सगवंत | माहुर | पुलासपुर | नगरबाहिर ] | पांचस ऊं सारानां दारबई ॥ ॥ FU सी एवं खच्खुतं ते ममं पोलासपुरस्म | नगरसब दिया। पंच कुंकारा वलसा | तिहां | उमे | पादिदारी पारिपाटियां || संधारादिक ] ] लेईन । ] विचर जो || तिवारपछी ॥ | तचणं उझे पाडिदारियंपी जा व संघारयंत्र गिल्हित्ताएं दिहरह तते एंस श्रमण सगवंतमहावीरदेव || सद्दालपुत्र || गोसालाना | श्रावकनुं । । पहुवचनसांतली नई || मणे सगवं महावीरे| सद्दाल पुत्र रमजीवि वा सग स्म । एयमहं पडिसुऐति जिहां सद्दाल पुत्र | | गोसालाना श्रावकनां । | पांचसई ऊं सारना हार बीति | प्रभुक एब लीक सद्दान पुत्त्रस्म या जीवीउ वा सगा पंचऊंन कारावासप्सु फा सुएएस
बाताह