SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 426
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ श्रीअनुयोगद्वारंमलधारि श्रीहेमचन्द्रसूरि वृत्तियुतम्। // 404 // [3] अनुगमः। सूत्रम् 601-604 3.1 सूत्रानुगमः 3.2 निर्युक्त्य नुगमः। नियुक्त्यनुगमस्य त्रयोभेदाच। ॥अथ अनुगमाख्यं तृतीयमनुयोगद्वारम् / से किं तं अणुगमे? 2 दुविहे पण्णत्ते, तंजहा- सुत्ताणुगमे य निजुत्तिअणुगमे य। से किंतं निब्रुत्तिअणुगमे?, 2 तिविहे पण्णत्ते, तंजहा- निक्खेवनित्तिअणुगमे उवघातनिजुत्तिअणुगमे सुत्तप्फासियनिजुत्तिअणुगमे / / सूत्रम् 602 // से किंतं निक्खेवनिश्रुतिअणुगमे?, 2 अणुगए,॥सूत्रम् 603 // से किं तं उवायनिजुत्तिअणुगमे?, 2 इमाहिं दोहिं गाहाहिं अणुगंतव्वे, तूंजहा, उद्देसे 1 निद्देसे यं 2 निग्गमे 3 खेत्त 4 काल 5 पुरिसे य 6 / कारण 7 पच्चय 8 लक्खण ९णये 10 समोयारणा 11 णुमए 12 / / 133 / / किं 13 कइविहं 14 कस्स 15 कहिं 16 केसु 17 कह 18 किच्चिरं हवइ कालं 19? / कइ 20 संतर 21 मविरहितं 22 भवा २३ऽऽगरिस 24 फासण 25 निरुत्ती 26 // 134 // सेतं उवघातनिनुत्तिअणुगमे // सूत्रम् 604 // ( // 151 // ) से किं तं अणुगमे, इत्यादि। अनुगमः, पूर्वोक्तशब्दार्थः, सच द्विधा, सूत्रानुगमः, सूत्रव्याख्यानमित्यर्थः / निर्युक्त्यनुगमश्चनितरां युक्ता:सूत्रेण सह लोलीभावेन सम्बद्धा निर्युक्ता अर्थाः, तेषां युक्ति: स्फुटरूपतापादनम्, एकस्य युक्तशब्दस्य लोपा नियुक्तिः, नाम स्थापनादिप्रकारैः सूत्रविभजनेत्यर्थः / तद्रूपोऽनुगमस्तस्या वानुगमोव्याख्यानं निर्युक्त्यनुगमः, स च त्रिविधः / निक्षेपो नाम स्थापनादिभेदभिन्नः, तस्य तद्विषया वा नियुक्ति: पूर्वोक्तशब्दार्था निक्षेपनियुक्तिः। तद्रूपस्तस्या वानुगमो निक्षेपनियुक्त्य Oया। (r) से तं निक्खेवनिज्जुत्तिअणुगमे', इत्यधिकम् / 0 मूलगाहाहि। 0 ब्वो। 7 समोआरणाणुमए 11' इत्यङ्घ तथाग्रे तदनुसारेण 25 अन्ता अङ्काः सन्ति। / // 404 //
SR No.600442
Book TitleAnuyogdwar Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size31 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy