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________________ *4 श्रीअमम जिन चरित्रम् कोशलायां प्रवेशोच्छवः // 232 // रत्नादि मुकुटच्छलात् / पुनौरवयन्त्येव निजमुर्दाधिरोपणात् / / 81 // दवदंत्या समं हस्त्यारुढः पित्राज्ञयाऽचलत् / नलोऽपि निजशृंगारापास्तशृङ्गारजन्मरुक् // 82 / / कुल०॥ धृतचामरयोर्लोको धृतश्वेतातपत्रयोः / वध्वैव भेदं निश्चिक्ये श्रीराजयुवराजयोः // 83 // चतु- रंगचमूध्वानदिकोलाहलैरपि / मांगल्यतूनिस्वानः कुर्वन् शब्दमयं जगत् / / 84 // मंचस्थिताभिर्वेश्याभिर्गीयमानगुणोदयः / नागरै| रय॑मानश्च पुष्पस्रग्वसनादिभिः // 85 / पूर्वद्वारा प्रविश्यांतर्नगरीमतिहस्तयन् / नृपोऽगान्निषधोऽक्लप्तनिषेधः पश्यतां पथि // 86 // // त्रिभिवि०॥ नलं भैमीयुतं यान्तं कौतुकाद् द्रष्टुमागताः / इत्यचेष्टंत नागर्यः स्वसौन्दर्यमदोद्धताः // 87 // सस्तै रत्नांकुभिन्न | वामपादमुदंचितम् / विभ्रती काचिदाऽचारीदेकपादव्रतं तदा / / 88 // कर्णाब्जरेणुनाकीर्णमेकमन्यच्च सस्मितम् / नेत्रं वहन्ती का| प्याख्यत्संकीर्णरसनाटितम् // 89 // कापि कुंकुमलिप्तांगी समुत्तंभितदोईया / निमज्जन्तीव रागाब्धौ हस्तालंबमयाचत // 90 // कापि स्तम्बरमारुढं नलं वीक्ष्येति दर्पतः। किलिञ्चद्विपमारुक्षत्समानस्थितिलोलुपा // 91 // पार्श्वे स्थितां दवदंती भर्यालपति स्वयम् / | कयापि कोपाद् व्यावर्ति गर्द्धप्रहिताऽप्यहो // 92 // अर्कतापेऽपि नो मम्लुः काश्चित्सौधाग्रभृस्थिताः / पअिन्य इव तयुग्मवीक्षारall सभृता इव // 13 // अनंगेन रतिः संक्रंदनेन च पुलोमजा। गौरी कपालिना ऋक्षेशेन शोच्या च रोहिणी॥१४॥ इयं तु भीमजा पित्रोरशोच्यैवाद्भुताकृतिः / नलेन रुपसौभाग्यश्रीसमानेन संगता // 15 // धनुर्विद्याश्रमेणाद्य फलितं पुष्पधन्वनः। वंद्योऽद्याभूद्विधाताऽपि चिरादुचितयोजनात् // 96 / / इति वृद्धपुरन्ध्रीणां स्तुतिपीयूषसेचनैः / प्रोन्मीलत्पुलकांकूरपूरां क्षेत्रभुवं | वहन् // 97 // प्रारब्धमंगलं केतुतोरणस्वस्तिकादिभिः / प्रविवेश समं पित्रा नलः सौधं शुभेऽहनि // 98 // पं०कु० // अथो यथोचित | गेंहदेवानभ्यर्च्य भक्तितः। सामंतादींश्च सन्मान्य विससर्ज नरेश्वरः // 19 // पुर्यां चैत्येषु भैम्याश्च नलो देवानदर्शयत् / हंस्याः सरस्सा *-*-*-*-*-*-*-*48 8-8*488-*-*- // 232 //
SR No.600399
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1942
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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