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________________ VI श्रीविंशति 18| हुंति बोद्धव्या १० जइधम्मो इत्तो पुण ११ दुविहा सिक्खा य एयस्स १२ ॥ १३ ॥ भिक्खाइविही सुद्धो १३ तयंतराया असुद्धि-४२लोकानाकाप्रकरणाला लिंगता १४। आलोयणाविहाणं १५ पच्छित्ता सुद्धिभावो य १६॥ १४ ॥ तत्तो जोगविहाणं १७ केवलनाणं च सुपरिसुद्धति १८|| दित्व विशिका ॥ २ सिद्धविभत्ती य तहा १९ तेसिं परमं सुहं चेव २० ॥ १५ ॥एए इहाहिगारा वीस वीसाहिं चेव गाहाहिं । फुडवियडपायडत्था नेया ॥ | पत्तेय पत्तेयं ॥ १६ ॥ एए सोऊण बुहो परिभावंतो उ तंतजुत्तीए । पाएण सुद्धबुद्धी जायइ सुत्तस्स जोगुत्ती ॥ १७ ॥ मज्झ-19 ले त्थयाइ नियमा सुबुद्धिजोएण अत्थियाए य । नज्जइ तत्तविसेसो न अन्नहा इत्थ जइयव्वं ॥ १८॥ गुणगुरुसेवा सम्मं विणओ | तेसिं तदत्थकरणं च । साहूणमणाहाण य सत्तणुरूवं निओगेणं ॥ १९ ॥ भव्वस्स चरमपरियट्टवत्तिणो पायणं [णिणो] परं एयं । | एसोवि य लक्खिज्जइ भवविरहफलो इमेणं तु ॥ २०॥ इति प्रथमाधिकारविंशिका समाप्ता १॥ । पंचत्थिकायमइओ अणाइमं वट्टए इमो लोगो । न परमपुरिसाइकओ पमाणमित्थं च वयणं तु ॥१॥ धम्माधम्मागासा Bागइठिइअवगाहलक्खणा एए । जीवा उवओगजुया मुत्ता प्रण पुग्गला णेया ॥२॥ एए अणाइनिहणा तहा तहा नियसहावओ नवरं । वटुंति कज्जकारणभावेण भवे ण परसरूवे ॥ ३ ॥ नविय अभावो जायइ तस्संत्तीए य नियम विरहाओ । एवमणाई एए तहा तहा परिणइसहावा ॥४॥ इत्तो उ आइमत्तं तहासहावत्तकप्पणाएवि । एसिमजुत्तं पुटिव अभावओ भावियन्वमिणं ॥ ५ ॥ नो परमपुरिसपहवा पओयणाभावओ १ दलाभावा २। तत्तस्सहावयाए तस्सव तेसिं अणाइत्तं ॥६॥ न सदेवयऽस्स भावो | को इह हेऊ तहासहावतं । हताभावगयमिणं को दोसो तस्सहावत् ॥ ७॥ सो भावऽभावकारणसहावभयवं हविज्ज नेयपि । | सव्वाहिलसियसिद्धीओ अनहा भत्तिमंतं तु ॥८॥ धम्माधम्मनिमित्तं नवरमिहं हंत होइ एसोवि । इहरा उ थयकोसाइ सब भावा २ । तत्तस्सहावयाग ७॥ सो भावभावकारणसहावभाव ययकोसाइ सव्व
SR No.600390
Book TitlePratya Saraswat Vibhram Dan Shatrinshika Visheshanvati Vinshatika Cha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRushabhdev Kesarimal Samstha
PublisherRushabhdev Kesarimal Samstha
Publication Year1927
Total Pages210
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size17 MB
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