SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 33
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ननुभूतिवादिना पारमार्थिकी जानिग डियूने भवनानु काल्पनिकी न्यू म्यूतरा सिद्धिरित्यत आह नचक अवधीरितः कल्पिता कूस्मिन रूपो विशेषो येनानुभूनिमात्रेणन तथा उक्त परिहारानं गी कारेख व्याह निबाध कमाह अन्यथेति नदेन देशेति धूमवत्वे किंमहान मनिष्ठ हेतु रुन पर्वत निष्ठाः मिहिः द्वितीयेसाथ नदि कल निदर्शन मिति दूष्णे नाही शित पदवी व्यतिरेकेणुपरिमाणमस्तौग्न्यर्थः अन्यथाः मिर्द्धिपरिहरति नवव्या प्यचासिद्धिरिति स पाहिलेला मासाना स्थिति व्यष्यते सतिया धर्म नया प्रमितत्वे मिलने परीनमसिद्ध नवकविताक वितत्त्ववैपम्याहेतोरन्यतरा सिद्धिराशे कनीया अवधीरितकल्पिताक स्थितवि शेष स्थान सुनिन्नू मात्रस्याभयवादिसिद्धलाई न्यया धूमव च सा पिन देनद्देश निद्यन्नादि : ान नचान: सीपधि प्रेयसिदी व्याप्यत्वासिद्धिरित्यभिधीयते चहा धर्मनाः सिद्धिन विधानमाश्रयरूपासिद्धा वाश्रयासिद्धिस्तहिशे वर्णपात्वाप्रतीपातुसिद्ध साधन मिति मामपि द्विविधाकेचिदमिधा निसाध्या राम सियासाध्यरूपासि यनेनिः नधानानानषम पणन येवढयाट | चहारे प्रसिद्धदेन यासिद्धिरिति नच व्याप्यत्वासिद्धिनोम सोपाधिकः संवन्धः निरुपाधिके सबधस्यव्याशित्वा सोपाधिक पाधिसंबंध वैधुष्पोरिति नदेन समभिसंधायाह सोपाधिकस्यैवनयाना सामिडो
SR No.600389
Book TitleTattvapradipika Nayanprasadini Tika
Original Sutra AuthorN/A
AuthorChitsukhmuni, Pratyayaswarupmuni, Nirmaloddhavsinh
PublisherNirmaloddhavsinh
Publication Year
Total Pages692
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size55 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy