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________________ AS प्रकरणम् आगमसार S ॥५२॥ ISHA सहायगुण, अने त्रीजो आकाशास्तिकायद्रव्य तेना चार गुण छे एक अरूपी बीजो अचेतन त्रीजो अक्रिय चोथो अवगाहना दानगुण, हवे कालद्रव्यना चारगुण कहे छे. एक अरूपी बीजो अचेतन त्रीजो अक्रिय चोथो नवापुराणवर्तनालक्षण, हवे पुद्गलद्रव्यना चारगुण कहे छे. एकरूपी बीजो अचेतन त्रीजो सक्रिय चोथो मिलणविखरणरूप पूरणगलन गुण, हवे जीवद्रव्यना चार गुण कहे छे. एक अनंतज्ञान बीजो अनंतदर्शन त्रीजो अनन्तचारित्र चोथो अनंतवीर्य ए छद्रव्यना गुण कह्या ते नित्यध्रुव छे. | हवे छद्रव्यना पर्याय कहे छे धर्मास्तिकायना चारपर्याय छे एक खंध, बीजो देश, त्रीजो प्रदेश, चोथो अगुरुलघु, | अधर्मास्तिकायना चारपर्याय. एकखंध, बीजोदेश, त्रीजोप्रदेश, चोथो अगुरुलघु; पुद्गल द्रव्यना चारपर्याय एकवरण | बीजो गंध, त्रीजो रस, चोथो स्पर्श अगुरुलघुसहित; तथा आकाशास्तिकायनाचार पयोय. एकखंध, बीजो देश, त्रीजो |प्रदेश, चोथो अगुरुलघुः कालद्रव्यना चारपर्याय. एकअतीत काल, बीजो अनागतकाल, चीजो वर्तमानकाल, चोथो अगुरुलघुः अने जीव द्रव्यना चारपर्याय. एक अव्याबाध, बीजो अनवगाह, श्रीजो अमूर्तिक, चोथो अगुरुलघु. ए छे द्रव्यनापर्याय कह्या. | हवे छ द्रव्यना गुणपर्यायर्नु साधर्म्यपणुं कहे छे. अगुरुलघुपर्याय सर्वद्रव्यमां सरीखो छे अने अरूपीगुण पांच द्रव्यमां छे एक पुद्गलद्रव्यमां नथी; तथा अचेतनगुण पांच द्रव्यमा छे एकजीवद्रव्यमां नथी, अने सक्रियगुणजीव तथा पुद्गल ए बे द्रव्यमा छे बाकी चारद्रव्यमा नथी; तथा चलणसहायगुण एकधर्मास्तिकायमा छे, बीजा पांचद्रव्यमां नथी; ***** ॥५२॥
SR No.600385
Book TitleJivvicharadi Prakaran Sangraha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorJinduttasuri Gyanbhandar
PublisherJinduttasuri Gyanbhandar
Publication Year1928
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size22 MB
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