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जंबु
माला ॥ का
..| जन्मन्त । का० । कोडा कोड मरतां सही । मो० । बेदन जीव भोगत ॥ का० १६ ॥ जन्म जरा मरण तणो ||
। मो०। कष्ट महा विकराल ! का०। काल अनाद सुं भोगव्यो । मो० । कर्म की दुर्जय चाल ।का० २०॥ संजम सर समता भरथो । मो० । झूलत मोज अपार । का०। शूरा ने सुख दायकू । मो० । कायर ने दुखकार । का० २१ ॥ थोडा जीतब कारणे। मो०। मनुष्य जन्म मत हार । का। टल से सब दुख ताहरा । मो०
आजावो हमची लार ॥ का० २२ ॥ नेम नाथरा जल परे । मो०। अबिचल कीजे साथ । का। ओप वधे पृ.७६
बहु लोक में । मो० । निवडै ग्रह्याकी हाथ ॥ का० २३॥ ज्यां साची छै प्रीत जी । मो० । ढील न करो अब रंच । का० । ज्योढ बला मुतलब तणा । मो०। तोहिव में करो खंच ॥ का० २४ ॥ ढाल भी बत्तीसमी। मो० । जंबू तूंबा समान । का० । आप त्तिरे पर तारवे । मो० । मेटया तिमिर ज्यूं भान ॥ का० २५ ॥
॥दोहा ॥ परम ज्ञान जलधार मं धुप्यो दुरति दुख देन । प्रकटी चेतन शक्तदी खुल्या अभ्यंतर नैन ॥ १ ॥ सब भामिनी मिल इम कहे भली विचारी नाथ । तुम सरीसा खांविद मिल्या ति हाथ ॥ २॥ चरण शीष धर वीनवे धामी विषय उपाध । मोह वावली थायने । खमजे सो अपराध ॥ ३ ॥ धनि है भाग हमारडा। मिल्या आप भरतार। और पति जग डोवडा तुमको तारण हार ॥ ४॥ देरन कीजे लीजिये जल्दी संजम भार। खिदमन में हाजिर अछां । कंथ तिहारी लार ॥ ५ ॥
॥ ढाल तेतीसवी ॥ देशी रास की अंजणा की चाल ॥ ऐतले दिन माण ऊगियो। नाशियो ||