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समवसरणं.
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पामुक्खाणं समणोवासियाणं तिन्नि सयसाहस्सीओ अट्ठारस-सहस्सा उक्कोसिया समणोवासियाणं संपया हुत्था ॥ सू. १३७॥ समणस्स णं भगवओ महावीरस्स तिन्नि सया चउद्दसपुवीणं अजिणाणं जिणसंकासाणं सव्वक्खर-सन्निवाईणं जिणो विव अवितहं वागरमाणाणं उक्कोसिया चउद्दस-पुव्विसंपया हुत्था ॥सू. १३८॥ समणस्स णं भगवओ महावीरस्स तेरस सया ओहिनाणीणं अइसेस-पत्ताणं उक्कोसिया ओहिनाणीणं संपया हुत्था॥सू. १३९॥ समणस्सणं भगवओ महावीरस्स सत्त सया केव
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