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श्रीपार्श्वगणधरपर्षद्
कल्प० बारसा०
| चरि०
॥४५॥
१५९॥ पासस्स णं अरहओ पुरिसादाणी-पार्श्वनाथयस्स अट्ठ गणा अट्ठ गणहरा हुत्था, तं- 11 जहा-सुभे य१ अज्जघोसे य२. वसिदे ३ बंभयारि य ४ । सोमे ५ सिरिहरे ६। चेव. वीरभद्दे ७जसेविय८॥स.१६०॥ पासस्स णं अरहओ पुरिसादाणीयस्स अज्जदिण्ण-पामुक्खाओ सोलस समण-सा- | हस्सीओ उक्कोसिआ समण-संपया हुत्था | ॥सू. १६१ ॥ पासस्स णं अरहओ पुरि- || सादाणीयस्स पुप्फचूला-पामुक्खाओ अट्ठ- | तीसं अज्जिया-साहस्सीओ उक्कोसिआ अ
CHAMACHCRACHAR
।। ४५।।