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________________ विशेषा वश्यक HASHA गाथा: श्रीमलधा-18| मई च महाभई पडिम तत्तो य सव्वओभई । दो चत्तारि दसेव य दिवसे ठासीय अणुबद्धं ॥ १९७५ ॥ ५३० यातादष्टापद गोयरमभिग्गहजुयं खमण छम्मासियं च कासी या पंचदिवसेहिं ऊणं अव्वहिओ वच्छनयरीए ॥ १९७६ ॥ ५३१ ॥३२॥ दस दो य किर महप्पा ठाइ मुणी एगराइयं पडिमं । अट्ठमभत्तेण जई, एक्कक्कचरिमराईयं ॥ १९७७ ॥ ५३२ 8 दो चेव य छट्ठसए, अउणत्तीसे उवासिया भयवं । न कयाइ निच्चभत्तं, चउत्थभत्तं च से आसि ॥ १९७८ ॥ ५३३ ॥ है बारसदासे अहिए, छटुं(भत्तं जहण्णयं आसी) । (सव्वं) च तवोकम्मं अप्पाणय आसि वरिस्स ॥ १९७९ ॥ ५३४ ।। शतिनि सते दिवसाणं, अउणापन्नं तु पारणाकालो । उक्कडुयनिसज्जाणं, ठियपडिमाणं सए बहुए ॥१९८० ॥ ५३५॥ | पव्वज्जाए पढमं दिवसं एत्थं तु पक्खिवित्ताणं । संकलियंमि उ संते, जं लद्धं तं निसामेह ॥ १९८१ ॥ ५३६ ॥ | वारस चेव य वासा, मासा छच्चेव अद्धमासो य । वीरवरस्स भगवओ, एसो छउमत्थपरियाओ॥ १९८२ ॥ ५३७ ।। एवं तवोगुणरतो, अणुपुव्वेणं मुणी विहरमाणो । घोरं परीसहचमुं, अहियासेत्ता महावीरो ॥ १९८३ ॥ ५३८ ॥ ट्र उप्पन्नमि अणंते, गट्ठमि य छाउमथिए णाणे । रातीए संपत्तो, महसणवणमि उज्जाणे ॥ १९८४ ।। ५३९ ॥ अमरनररायमहिओ, पत्तो वरधम्मचक्कवट्टित्तं । बितियंपि समोसरणं, पावाए मज्झिमाए उ ॥ १९८५ ॥ ५४०॥ | तत्थ किर सोमिलज्जोरी माहणो तस्स दिक्खकालंमि । पउरा जणजाणवया, समागया जन्नवाडंमि ॥ १९८६ ॥ ५४१ ॥ | एगते य विवित्ते, उत्तरपासमि जनवाडस्स । तो देवदाणविंदा, (कति महि) मंजिणिदस्स ।। १९८७ ।। ५४२ ॥ भवणवइवाणमंतर जोइसवासी विमाणवासी य । सव्विड्डीए सपरिसा, कासी नाणुप्पयामहिमं ।। १९८८ ।। भा. ११५ ॥३२॥
SR No.600286
Book TitleNandisutrasya Churni
Original Sutra AuthorRushabhdevji Keshrimalji Shwetambar Samstha
Author
PublisherRushabhdevji Keshrimalji Shwetambar Samstha
Publication Year1928
Total Pages238
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_nandisutra
File Size19 MB
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