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________________ उजयंतस्तुतिः घ. IYA नसंघपतिः श्रीदे DAI वणाकरणपउणमणकरणा। ता किं तुमेहिं एयं असमं असमंजसं विहियं ॥३५।। भणइ धणो नियतित्थे जइवत्थामरणमाइ जिण पूछ। कुणिमो ता किं एसो तीसे विद्धसणं कुणइ ॥३६।। वरुणो आह सतित्थे अविहिं कस्सवि न काउ दाहामो। संसइओ भणइ धर्म० संघा- नियो को जाणइ कस्स तित्थमिणं? ॥३७॥ भणइ धणो तित्थमिणं अम्हच्चिय चेइवंदणामज्झे । जेण इमा अग्गेविहु उजिंतिबाइ चारविधौ गाहत्थि ॥३८॥ जइ मे अपञ्चओ इह अम्हं संघे सिसुं तरुण वुड्ढे । इथिपि लहु पढावसु तओ निवो पचयनिमित्तं ॥३९॥ पवण॥३३॥ गइरहडीए आणावइ पेसिऊण नियपुरिसं । सिणवाल्लिगामओ लहुं पुत्तिं धणदेवसिट्ठिस्स ॥४०॥ सेयंवरआसंबरसंघसमक्खं इमा। निवेणुत्ता। किं तुह चिइवंदणयं एइ ? तओ साऽऽह वादंति ॥४१॥ ता पुत्ति ! झत्ति तं कहसु सावि अइकरकरेण य सरेण । सयलं |चिइबंदणयं पढेइ ता जाव गाहमिमं ॥ ४२ ॥ उजितसेलसिहरे दिक्खा नाणं निसीहिया जस्स । तं धम्मचकवदि अरिहनेमि नमसामि ॥४३॥ इय सोउ निवो लोओ हरिसाउलियनियमणो इमं भणइ । जयइ सियमिक्खुसंघो तित्थमिण नूणमेयस्स ॥४४॥ तप्पमिइ इमा गाहा पहिजई चेहवंदणामज्झे । गीयत्थेहिं असढेहिं पुवमूरीहिं न निसिद्धा ॥ ४५ ॥ जो उण पुवायरियायरियं अन्नह मयं कुणइ तस्स । भणिओ इय दंडो भदबाहुपहुणा विइयअंगे ॥४|| आयरियपरंपरएण आगयं जो उ अप्पबुद्धीए । कोवेइ च्छेयवाई जमालिनासं स नासेह ॥४७ । सकारिय सम्माणिय अह धणसिही विसजिओ रना। लद्धजओ संघजुओ पत्तो भुजोवि उजिंते ॥४८॥ पूएवि नेमिनाहं वरवस्थाभरणकुसुममाईहिं । दाउ अवारियदाणं काउं अठाहियामहिमं ॥ ४९ ॥ नेमिपयपउममू|ले निययमणं मुत्तु गुरुविभूईए । नियसंघजुओ पत्तो कमसो हथिणपुरंमि धणो ॥५२॥ कयसंमुहागयनिवपमुहलोओचिओ धणो सिठ्ठी । जिणपत्रयणं पभाविय मुगईए भायणं जाओ ॥५॥ एप नेमिनाथवंदनाह्वयो दशमोऽधिकारः।। worlRIMINAINITISHESH ॥३३७०
SR No.600278
Book TitleChaityavandanbhashyam
Original Sutra AuthorDevendrasuri, Dharmkirtisuri
Author
PublisherJinshasan Aradhana Trust
Publication Year1988
Total Pages490
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size12 MB
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