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सवाउत्ति ॥८२।। भणिया देवी जइ नाम एस जाओ नपुंसओ मज्झ । ता कि तीरइ तुमए पुरिसो काउं सुकुसलाए? ॥८३॥ अभया भणइ जइ इमं रमाविउं नो तरामि तो नियमो । जावज्जीवं महिलत्तणस्स अइनीयचरियस्स ॥८४॥ इय विहियपइन्नाए समए नयरंतरम्मि पविसित्ता । भणिया पंडियाधाई सुदंसणेणं जहा संगो ॥८५।। सिज्झई लहुं कुण तहा एयम्मि अनिम्मिए न मम जीयं । भणिया एसा तीए न सुंदरं चितियं तुमए ।।८६।। सो पररामासु सहोयरत्तमेगंतियं समुबहइ । किं पुण तुह सरिसीसुं नरेंदभजासु, तो भणइ ॥८७।। अम्मो ! जहा कहंची संपाडेयब्वओ मम तुमए । जम्हा कविलाय पुरो मया पयिण्णाकया एसा ॥४८॥ धाईए चितियं धणियमेत्थ एक्को परं उवाओत्ति । सो पव्वदिणे चउरंगपोसहो सुन्नगेहम्मि ।।८९।। ठाइ मसाणे वा काउसग्गपडिमाण जीवियनिरासो। एगागी तत्थ ठिओ अनजमाणो निसासमए ॥९०॥ जइ कामदेवपडिमानिभेण सकिजए इहाणेउं । वंचेत्तु दारपाले ता कहसु जहा तहा काहं ॥९१॥ भणियं देवीइ अवित्थमेव संपज्जए तओ धाई । अट्टमिपव्वे सुन्ने गिहम्मि पडिमाठियं संतं ॥९२॥ दद्रु निठुरहियया तस्सुप्पाडणमहायरइ ताहे । उप्पाडित्ता चेडीहिं अप्पिओ अभयदेवीए ॥९३।। तो कामसत्थावित्थारिएहिं नाणाविहोवयारेहिं । तं खोभिउं पयट्टा विमुक्कनीसेसनियलज्जा ।।९४।। सो सविसेसं पच्चक्खाणट्ठाणे मणं निरुभित्ता । सिद्धिसिलोवरिसरइंदुकुंदसंखुजलच्छाए ॥९५।। अप्पाणं. ठावित्ता तद्देससमीववत्तिणो सिद्ध । धुणियासेसकिलेसे निउणं परिचिंतिउ लग्गो ॥९६॥ तो कटुनिम्विसिट्ठ तणुचेटुंदुद्धरं धरंतस्स। रयणी अइच्छिया सा न कोवि जाओ वियारो से ॥९७।। जाया पभायसमए बहु विलक्खत्तणं परिवहंती। तिक्खेहिं निययनक्खेहिं दारिउ देहमह लग्गा
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