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शब्दार्थी तीन प्रदेशात्मक ति० तीन प्रदेश को फु० स्पर्शते स० सब ठा० स्थान में फु० स्पर्शते ज० जैसे ति तीन भूप्रदेशात्मक को फु० स्पर्शा हुवा ए० ऐसे ति० तीन प्रदेशात्मक जा० यावत् अ० अनंत प्रदेशात्मक की
साथ सं० जोडना ज जैसे ति तीन प्रदेशात्मक ए. ऐसे जा० यावत् अ० अनंत प्रदेशात्मक भा० कहना !॥ ४ ॥१० परमाणु पो० पुद्गल भ० भगवन् का० काल से के० कितना हो. होता है गो० गौतम ज०
सियं फुसमाणो सव्वेसुवि ठाणेसु फुसइ । जहा तिपएसिओ तिपएसियं फुसाविओ, एवं तिपएसिओ जाव अणंतपएसिएणं संजोएयव्वो, जहा तिपएसिओ एवं जाव । अणंतपएसिओ भाणियन्वो ॥ ४ ॥ परमाणु पोग्गलेणं भंते ! कालओ केवचिरंहोइ?
गोयमा ! जहण्णेणं एगं समयं, उक्कोसेणं असंखेजं कालं, एवं जाव अणंत पएसि
तीन प्रदेशी स्कंध परमाणु पुद्गल को स्पर्शते हुवे तीसरा, छट्ठा व नक्वां भांगा को स्पर्श. तीन प्रदेशी स्कंध । भावार्थ
द्वि प्रदेशी स्कंध को स्पर्शते हुए पहिला, तीसरा, चौथा, छट्ठा, सातवां व नववां को स्पर्शे और तीन प्रदेशी तीन प्रदेशी को स्पर्शते हुवे सब भांगे को स्पर्श. जैसे तीन प्रदेशी का कहा वैसे ही चार, पांच 4 यावत् संख्यात असंख्यात व अनंत प्रदेशी का जानना. और जैसे तीन प्रदेशी स्कंध से परमाणु पुद्गल 25 यावत् अनंत प्रदेशी के भांगे कहे वैसे ही चार, पांच यावत् अनंत प्रदेशी की साथ जानना ॥ ४ ॥ अहो 3. भगवन् ! परमाणु पुद्गल परमाणु पुद्गलपने कितने काल तक रहे ? अहो गौतम ! जघन्य एक समय है।
48 पंचांग विवाह पण्णत्ति ( भगवती) सूत्र <a
पांचवा शतकका सातवा उद्देशा