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- पंचमांग- विवाह प्रज्ञप्ति ( भगवती ) सूत्र 40
९७३ ग्यारवा उद्देश सुदर्शन शेठ के काल के प्रमाण आश्रय प्रश्नोत्तर. १३८० सुदर्शन का पूर्व भव महाबलकुमार वस्तुकादयचा. दीक्षवगैरा. ३८१ वारवउदेशा आलंभिका नगरी के
... १५६२ १९८ ... १५९६
श्रावक की चर्चा. देवस्थिती आश्रिये १६३८ | ३८२ पुद्गल नामक परिवर्जक को ... १६४८
उद्देशा
१२ द्वादश शतक का प्रथम ३८३ शंखजी पोखली जी श्रावक का. २८४ तीन प्रकार की जागरणा ३८५ परस्पर कुश से कर्म बन्ध
१६५५ ... १६७१
. १६९३
द्वादश शतक का दूसरा उद्देशा ३८६ जयंती व ई के प्रश्नोत्तर;
. १६७६
३८७ जीव हलका भारी काय से होवे. १६७२ ३८८ संसारिक जीवों का अन्त नहीं होता है१६८२ ३८९ मूता जागता. लवन्तं निर्बल, दक्ष अदक्ष इन में कौन अच्छा कौनबुरा ? १६८४
४९० षांचों इन्द्रिय के वश्य संसार द्वादशम शतक का तीसरा ३९१ साल नर्क के नाम गोत्र द्वादश शकत का चौथा
भ्रमें १६८८ उद्देशा.
... १६९९
उद्देशा
३९२ प्रमाणु पुद्गल स्कन्धों का कथन ३९३ पुद्गल परावर्तन का कथन द्वादश शतक का पांचवा उद्देशा ३९४ क्रोधमान माया लोभके नामों ... १७२८ ३९५ रूपी अरूपी चौस्पर्थी अठस्पर्थी १७३० 'बारवा शतक का छट्ठा उद्देशा
१६९०
... १७१७
३९६ ग्रहण किस प्रकार होता है. ... १७३७ ३९७ राहु के प्रकार व ग्रहण अंतर १७४२ ३९८ चन्द्रशशी क्यों सूर्य अदित्यक्यों ? १७४४ ३९८ चन्द्र सूर्य की अग्रममेहषी व सुखोप
भोग किस प्रकार के हैं. दृष्टांन्त. १७६५
११ विषयाणुक्रमणिका
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