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12 होना अलेस्से होजा ? गौयमा ! सलेस्से होजा, जहा कसायकुसौले, एवं छेदोव
ट्ठावणिएवि । परिहारविसुद्धीए जहा पुलाए । सुहमसंपराए जहा णियंठे । अह. क्खाए जहा सिणाए णवरं जइ सलेस्से होजा एगाए सुक्कलेस्साए होजा ॥ १९॥ सामाइय संजएणं भंते ! किं बढ़माण परिणाम होजा, हायमाण परिणाम होजा, अवद्विय परिणामे होज्जा ? गोयमा ! वड्डमाण परिणामे होजा जहा पुलाए
एवं जाव परिहारविसुद्धीए । 'सुहमसंपराय पुच्छा ? गोयमा ! वट्ठमाण परिणामे जैसे कहना ॥ १८ ॥ अहो भगवन् ! सामायिक संयमी क्या सलेशी होवे या अलेशी हो ! अहो गौतम ! सलेशी होवे वगैरह जैसे कषाय कुशील का कहा वैसे कहना. ऐसे ही छेदोपस्थापनीय का कहना. परिहार विशुद्ध का पुलाक जैसे कहना. सूक्ष्म संपरायका निग्रंथ जैसे कहना. यथाख्यात का स्नातक जैसे कहना. परंतु यदि लेश्या होवे तो एक शुक्ल लेश्या ॥ ११ ॥ अहो भगान् ! सामायिक संयमी क्या वर्धमान परिणामवाला, हायमान परिणामबाला, या अवस्थित परिणामवाला होवे ? अहो गौतम ! वर्धमान परिणामबाला वगैरह पुलाक जैसे कहना. यो परिहार विशुद्ध पर्यन्त कहना. सूक्ष्म संपराय की
4. अनुवादक-बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी
• महाशा-राजांबडादुर लाला सुखदेवसहायनी ज्वालाप्रसादजे *