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________________ | २८१३ ११-पंचांग विवाह पण्णचि (भगवती) मूत्र 4884 गोयमा ! वैयणिज आउयणामगुत्ताओ, चत्तारि कम्मपगडीओ वैदेइ ॥ २३ ॥ पुलाएणं भंते ! कइकम्मपगडीओ उदीरेइ ? गोयमा ! आउयवेयणिज्जवजाओ छकम्म पगडीओ उदीरेइ ॥ वउसेणं पुच्छा ? गोयमा ! सत्तविह उदीरएवा अट्ठविह उदीर• एवा छन्विह उदीरएवा; सत्तविह उदीरेमाणे आउयवज्जाओ सत्तकम्मपगडीओ उदीरेइ अट्टविह उदीरेमाणे पडिपुण्णाओ अट्टकम्मपगडीओ उदीरेइ ॥ छव्विह उदीरेमाणे आउयवेयणिजवजाओ छकम्मपगडीओ उदीरेइ ॥ पडिसेवणाकुसीले एवं चेव ॥ कसाय कुसीले पुच्छा, गोयमा ! सत्तविह उदीरए वा अट्टविह उदीरएवा, छविह नीय छोडकर सात कर्म प्रकृतियों वेदे. स्नातक की पूच्छा, अहो गौतम ! वेदनीय, आयुष्य नाम व गं. ये चार कर्म वेदे ॥ २३ ॥ अहो भगवन् ! पुलाक कितनी कर्म प्रकृतियों उदेरे ? अहो गौतम ! आयुष्य और वेदनीय ये दो वर्जकर छकर्म प्रकृतियों उदेरे. बकुश की पृच्छा, अहो गौतम ! सात कर्म उदेरे, आठ कर्म उदेरे अथवा छ कर्म उदेरे. सात में आयुष्य कर्म, वर्जना, आठ प्रतिपूर्ण और छ में आयुष्य व वेदनीय दो कर्म वर्जना. मतिसेवना कुशील का वैसे ही कहना, कषाय कुशील की पृच्छा, अहो गौतम मात, आठ, छ अथवा पांच कर्म उदेरे. सात की उदीरणा में आयुष्य कसै वर्जना. छकी उदीरणा में dagit पच्चीसवा शतक का छठा उद्देशा..428 HOTTES
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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