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भावार्थ
44 अनुवादक बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषीजी
तंचव जाव णो आयातिय ॥आया भंते ! चउप्पदसिए वंधे अण्णे पुच्छा ? गोयमा! चउप्पदेसिए खंधे सिय आया १, सिय णोआया २, सिय अवत्त आयातिय णो आया. तिय ३, सिय आयाय णो आयाय ४, सिय आयाय अवत्तव्वं ४, सिय णो आयाय अवत्तव्वं ४, सिय आयाय णो आयाय अवत्तव्वं आयातिय जो आयातिय १६; सिय आयाय णो आयाय अवत्तव्बाई आयाय णो आयायं १७. सिय आयाय
णो आयाओय अवतव्वं आयातिय णो आयातिय १८, सिय आयाओय णो आयाय क्वचित् भास्मा नो आत्मा के एकवचन बहुवचन के ४, कचित् आत्मा अवक्तव्य के एकवचन अनेकवचन के क्वचित नो आत्मा अवक्तव्य के एकवचन अनेकवचन के ४,यों१५ भांगे हुए १६ क्वचित् आत्मा, नो आत्मा व वक्तव्य एकवचन में१७ क्वचित् आत्मा नो आत्मा एकवचन में और अवक्तव्य अनेक वचन में८ नचित् आत्मा कवचन नो आस्मा बहुवचन और अवक्तव्य एकवचन और १९ क्वचित् आत्मा बहुवचन नो आत्मा व अवक्तव्य एक वचन में यों १९ मांगे पाते हैं. अहो भगवन् ! किस कारन से चतुष्क प्रदेशिक स्कंध में उक्त १९ भांगे पाते है ? अहो गौतम ! ! स्वपर्याय आश्री आत्मा २ पर पर्याय आश्री नो आत्मा ३ उश्य पर्याय आश्री
वक्तव्य ४ देश से स्वपर्याय दंश से पर पर्याय एसे चार भांग, स्वपर्याय व उभय पर्याय के एक बचन बहु पचन के चार भांगे, ऐसे ही परपयोय र उभय पर्याय के चार भांगे मीलकर १५ भांग होते हैं
* प्रकाशक-राजाबहादुर लाला मुखदेवसहायजी ज्वालाप्रसादजी.
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