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________________ जी उक्कोसेणं अयासहस्सं पक्खिवेजा, ताओणं तत्थ पउर गोयराओ पंउरपाणीयाऔ जहण्णेणं एगाहवा दुयाहंवा तियाहवा, उक्कोसेणं छम्मासे परिवसेज्जा, ॥ अत्थिणं गोयमा ! तस्स अयावयस्स केइ परमाणु पोग्गलमत्तेवि पएसे जेणं तासिं अयाण . उच्चारणवा, पासवणेणवा, खेलेणवा, सिंघाणेणवा, बंतेणवा पित्तणवा पूएणवा, सुकणवा,सोणिएणवा,चम्महिंबा, रोमेहिवा, सिंगहिवा, खुरेहिंवा, णहेहिंवा अणिकंत पुग्वे भवइ ? जोइणटे सम?, होजाइणं गोयमा ! तस्स अयावयस्स केइ परमाणुपोग्गल मत्तावे पएसे जण तासिं अयाणं उच्चारणवा जाव णहेणवा अणिकंत पुल्वे णोचेवणं भावार्थ यावत् महस्र बकरियों भरदेवे. उनके लिये घास चाग वगैरह की वहां बहुलता होवे. उस घाडे में उन धकारियों को जघन्य एकदिन दादिन तीन दिन यावत् उत्कृष्ट छमास तक रखे. अब अहो गौतम ! Nउन वाडे का कोईभी प्रदेश ऐसा रह सकता है कि जो बकरी उच्चार, प्रस्रवण, खेकार, सिंघाण (नाक कामेल ) वमन, पित्त, राध, शक्र, रुधिर, चर्म, रोग, शृंग, खुर, व नख से नहीं स्पर्श हुवा होवे ? अहो भगवन् ! यह अर्थ समर्थ नहीं होसकता है क्यों को वह वाडाका सब भाग बकरियों के मूत्र यावत् नख से स्पर्शाता हैं. वैसे ही इस महालोक की परमाणु जितनी जगह नहीं कि जहां जीव के जन्म जरा मरण न 4 भनुमादक बालपमधारी मुनि श्री अशोक * मकाशक-रामावहादुर लाला मुखदेवसहायनी बालाप्रसादजी *
SR No.600259
Book TitleAgam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Sthanakvasi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAmolakrushi Maharaj
PublisherRaja Bahaddurlal Sukhdevsahayji Jwalaprasadji Johari
Publication Year
Total Pages3132
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size50 MB
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