________________
शब्दार्थ
सत्र
) सूत्र ( भगवती
गौतम को क्रोधयुक्त मा. मानयुक्त मा० मायायुक्त लो० लोभयुक्त ए एमे अ. अस्मी भ० भांगा ने जानना २० ऐसे जा. यावत सं० संख्यान म. समयाधिक ठिक स्थिति वाले अ• असंख्यात स० समयाधिक स्थिति वाले तः उनयोग्य उ० उत्कृष्ट टि: स्थिति वाले म मत्तावीस भं० भांगे भा० कहना. ॥६॥
कोहोवउत्तय, मागोव उत्तेय, अहवाकोहोवउत्तेयमाणोवउत्ताय एवं असीइ भंगा नेयव्वा ।। ___ एवं जाव संखन समयाहिया ठिई, आपखेज समयाहिया ठिईए, तप्पाउग्गुकासियाए ठिईए
सत्तावीसं भंगा भाणियब्वा॥६॥इमीसेणं भंते! रयणप्पभाए पुढवीए तीसाए निरयावास एक१२ कधांत बदल लोभवंत बहुत ३ मानवंत एक मायावंतएक'मानवंत एक मायावंत बहुत १५मानवंत बहुत मायावंत एक १६ मानधन बहुत मायान बहुत १७ मानवंत एक लोभत एक १८ मानवंत एक लोभवंत बहुत १० मानवंत बहुन लोभात एक २० मानवंत बहुन न लोभ्वं बहुत ११
मायावंत एक लोभत एक २२ मायावंत एक लोभन बहुत २३ मायावंत बहुत लोभांत एक २४ मायावंत है वहत व लोभवंत वहुत. त्रिसंयोगी भांगे :२.१ कोयत, मानवंत, मायावंत एक, अनेक एमे मीलकर ३२१
भांगे होते हैं और चतःपयोगी के १६ भांगे होते हैं यो सब मील कर जघन्य स्थिति के नारकी में एक से अस्वी पर्यंत पांग होते हैं. और संख्यान समय में अधिक समय तक के जवन्य स्थिति वाले नारकी लगाहर उत्कृष्ट स्थिति वाले ना मचावीम भांगे होते हैं यह प्रथयार हुआ
AR2015 पहिला शतक का पांचवा उद्दशा
भावार्थ
-2012