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शब्दार्थ
4348 पंचमांग विवाह पण्णत्ति (भगरती) सूत्र 83809
पल्यापम का अ० असंख्यातवा भाग म. मनुष्य एक ऐसे दे देवता का आयुष्य ज जैसे . नारकी का. आयुष्य भ० भगवन् णे. नारकी का ति तिर्यंच का म. मनुष्य का दे० देवका अ० असंज्ञी आयुष्य का क. कौन क. किम से जा. यावत् वि० विशेषाधिक गोगौतम स० सर्व से थोडा दे०देवका म. मनुष्यका मं० मंख्यातगुना ति तिर्यंच का अ० असंख्यातगुना णे- नारकी का अ० असंख्यात गुना से० वह ए. ऐसे भं० भगान् । १ ॥२॥
एवं चेव, देवाउए जहा णेरइयाउए ॥ एयरसणं भंते ! णेरइय असण्णि आउयस्स, तिरिक्ख जोणिय असण्णि आउयस्स, मणुस्स असणि आउयरस, देव असाण आउयस्स, कयरे कयरेहिंतो जाव विसेसाहिएवा ? गोयमा ! सव्वत्थोवे देवअसण्णिआउए, मणुस्स असाणाआउए संखेजगुण, तिरिय असण्णिआउए असंखेजगुणे, णेरइय असण्णिआउए असंखेजगुणे । सेवं भंते भंतेत्ति।बिइओ उद्देसो सम्मत्तो॥१॥२॥ देवताका नारकी जैसे कहना. अहो भगवन् नारकी असंज्ञी आयुष्य यावत् देव असंज्ञी आयुष्य में कौन किससे अल्प यावत् विशेषाधिक हैं? अहो गौतम! सबने थोडा असंज्ञीका आयुष्य, उससे मनुष्य असंज्ञी का आयुष्य मंख्यात गुना, उससे तियद अज्ञीका आयुष्य असंख्यात गना, उतने नारकी अज्ञी आयुष्य असंख्यात गुना, है गौतम स्वामी कहते हैं कि अहो भगवन जैरे मैने प्रश्न किया उनका उत्तर जो आप ने दिया वह वैसेही है, अन्यथा नहीं है. यह पहिला शतक का दूसरा उद्देशा पूर्ण हुवा ॥१॥२॥
8809 पहिला शतक का दूसरा उद्देशा
भावाथे
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