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सूत्र
अर्थ
२०६ अनुवादक - बालब्रह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋषिजी
कंसेविमाणे चत्तारि पलिओ माहिती, महाविदेहवासे सिज्झहिति जात्र सव्त्र दुखा अंतं करोति ॥ ९ ॥ निक्खेवो उवाएगदसाणं चउत्थं अज्झयणं सम्मरां ॥ ४ ॥
{ पूर्ण कर, प्रथम बेवलोक के अरूणकत विमान में देवता मन उत्पन्न हुवा. चारपल्योपय का आयुष्य पाया वहां से आयुष्य का भव का क्षयकर महाविदेह क्षेत्र में जन्म धारनकर यावत् सिद्ध बुद्ध मुक्त हो सब दुःख का अन्त करेगा || ९ || इतिचौथा सूरादेव श्रावक का अध्ययन समाप्तम् ॥ ४ ॥
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• प्रकाशक- राजाबहादुर लाला सुखदेव सहायजी ज्वालाप्रसादजी ●
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