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(१) धर्ममें राजसत्ताके प्रवेशके विषयमें । (२) धर्ममें हरकत करनेवाली राजसत्ताके प्रवेशको यह सम्मेलन अनुचित मानता है।
शास्त्रमें बताये हुए विधिनिषेधको सदाके लिये स्वीकार करते हुए वर्तमान समयके अनिच्छनीय वातावरणकी शांतिके लिये पट्टक रूपमें ये नियम किये हैं। कोई भी साधु या श्रावक इन नियमोंसे विरुद्ध वर्ताव नहीं करेगा और दूसरेको विरुद्ध वर्ताव करनेका कारण नहीं देगा, ऐसी आशा की जाती है। वीर संवत् २४६०
विजयनेमिसरि विजयसिडिसूरि । चैत्र कृष्णा (वैशाखकृष्णा) ६ गुरुवार
आनंदसागर
विजयदानसरि । विक्रम संवत् १९९० (१९९१).
विजयनीतिसूरि । चैत्र कृष्णा (वैशाखकृष्णा) ६ गुरुवार
जयसिंहमूरिजी
विजयवल्लभसूरि इस्वीसन १९३४
विजयभूपेन्द्रसरि । एपील मास ता. ५ गुरुवार
मुनिसागरचंद्र
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