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३ संघ (१) श्रमणप्रधान जो संघ वह "श्रमणसंघ" यानी साधु है मुख्य जिसमें ऐसा साधु-साध्वी-श्रावक-श्राविकारूप चतुर्विध संघ वो " श्रमणसंघ"।
(२) श्री चतुर्विध संघके करने योग्य कार्योंमें श्री चतुर्विध संघकी मुख्य सत्ता है।
(३) “ सकलसंघ" श्रावकसंघको, श्रावक श्राविकाके समुदायके उपर शासनके गुन्हेके बारेमें उचित करनेका पूर्ण अधिकार रहेगा। लेकिन श्रावकसंघको साधु साध्वीयोंके प्रति राजा, मातापिता, भाई और मित्रके समान शुभ भावसे वर्ताव करना उचित है।
साधु साध्वीओंके उपर उनके संघाडेके बडोंकी संपूर्ण सत्ता है।
विशेष कारण होनेसे आचार्य या संघाडे के बडेकी आज्ञासे श्रावकसंघ, उस संघाडेके साधु साध्वीओंकी तरफ आवश्यक फर्ज अदा कर सकेगा। और यदि कोई साधु साध्वी अत्यंत अनुचित कार्य करे तो उस समय श्रावक संघ उचित कर सकता है, लेकिन इसका दुरुपयोग नहीं होना चाहिये ।
४ साधुओंकी पवित्रताके संबंधमें. (१) संघाडेके बड़े (माधु)ने अपने संघाडे के साधु-साध्वीओंके ब्रह्मचर्य आदि यतिधमकी अधिक रूपसे निर्मलता हो ऐसे
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