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विविध पूजन संग्रह
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अठारह अभिषेक
भूमिका हम अठारह अभिषेक इसलिए करते हैं कि इस दुषमकाल में अज्ञानता के कारण, प्रमाद के कारण परमात्मा की पूजा-सेवा करते हुए बहुत सी भूलें हो जाती हैं और अविधि हो जाती है, जिससे आशातना का दोष लगता है। परमात्मा को स्पर्श करने से परमात्मा की दिव्य शक्ति जो अंजनशलाका प्राण प्रतिष्ठा के विधान में परम पूज्य आचार्य भगवन्तों द्वारा आरोपित की जाती है, वह हमारे स्पर्श करने से नष्ट हो जाती है। क्योंकि हमारा शरीर आशुचि से भरा हुआ है। परमात्मा का शरीर दिव्य शरीर है, इसलिए परमात्मा को कभी भी स्पर्श नहीं करना चाहिए । परमात्मा की पूजा-सेवा दायें हाथ की अनामिका अंगुली से परमात्मा की आंगी (नव अंग के ऊपर चांदी/सोने के टीका) ऊपर केसर चंदनयुक्त द्रव्य से की जाती है।
जब हम परमात्मा को चंदन पूजा करते हैं तब ध्यान रखना कि परमात्मा को नाखुन स्पर्श नहीं होना चाहिए और कटोरी के अंदर चंदन है उसको भी नाखुन स्पर्श नहीं होना चाहिए और आराम से पूजा करना चाहिए ।
श्री अठारह अभिषेक
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