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________________ माणवए कामफासे य ॥ ४॥ धुरए पमुहे वियडे विसंधिकप्पे तहा पयल्ले य । जडियालए य अरुणे अ. ग्गिल काले महाकाले ॥५॥ सोत्थिय सोवत्थिय वद्धमाणगे तधा पलंबे य । णिचालोए णिचुजोए सयंपभे है चेव ओभासे ॥६॥ सेयंकर खेमंकर आभंकर पभंकरे य बोद्धवे । अरए विरए य तहा असोग तह वीतसोगे य॥७॥ विमले वितत विवत्थे विसाल तह साल सुव्वते चेव । अणियट्टी एगजडी य होइ विजडी य बोहो ४॥८॥ कर करिए रायऽग्गल बोद्धवे पुप्फ भाव केतू य। अट्ठासीति गहा खलु णेयत्वा आणुपुबीए॥९॥(सूत्र १०७) इति एस पाहुडत्था अभवजणहिययदुल्लहा इणमो । उक्कित्तिता भगवता जोतिसरायस्स पण्णत्ती ॥१॥ एस गहितावि संता थद्धे गारवियमाणिपडिणीए । अबहुस्सुए ण देया तचिवरीते भवे देया ॥२॥ सद्धाधितिउट्टाणुच्छाहकम्मबलविरियपुरिसकारहिं । जो सिक्खिओघि संतो अभायणे परिकहे जाहि ॥ ३ ॥ सो पवयणकुलगणसंधवाहिरो णाणविणयपरिहीणो । अरहंतथेरगणहरमेरं किर होति वोलीणो॥४॥ तम्हा विधितिउठाणुच्छाहकम्मबलविरियसिक्खिणाणं । धारेयवं णियमा ण य अविणएसु दायत्वं ॥ ५॥ वीरव रस्स भगवतो जरमरणकिलेसदोसरहियस्स । वंदामि विणयपणतो लोकप्पाए सया पाए ॥३॥(सूत्रं१०८) सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्रं सम्पूर्ण ॥ ग्रन्था २२०० 5-4551- 51SRAE dain Education Internation For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600245
Book TitleSuryapragnptisutram
Original Sutra AuthorMalaygiri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1919
Total Pages606
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_suryapragnapti
File Size12 MB
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