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________________ प्रज्ञापनाया: मलय० वृत्तौ. ५ पर्यायपदे पञ्चेन्द्रियतिरश्चांसू. ११५ ॥१९॥ भंते ! एवं वुच्चइ-जहन्नगुणकालगाणं बेईदियाणं अणंता पज्जवा पन्नत्ता ?, गोयमा! जहन्नगुणकालए बेईदिए जहमगुणकालगस्स बेइंदियस्स दवद्वयाए तुल्ले पएसट्टयाए तुल्ले ओगाहणद्वयाए छट्ठाणवडिए ठिईए तिट्ठाणवडिए कालवन्नपज्जवेहिं तुल्ले अवसेसेहिं वनगंधरसफासपञ्जवेहिं दोहिं नाणेहिं दोहिं अन्नाणेहिं अचक्खुदंसणपज्जवेहि य छट्ठाणवडिए, एवं उकोसगुणकालएवि, अजहन्नमणुक्कोसगुणकालएवि एवं चव, णवरं सहाणे छट्ठाणवडिए, एवं पंच वन्ना दो गंधा पंच रसा अट्ट फासा भाणियबा, जहन्नाभिणिबोहियनाणीणं भंते ! बेइंदियाणं केवइया पज्जवा पन्नत्ता!, गोयमा ! अणंता पज्जवा पन्नत्ता, से केणटेणं भंते ! एवं वुच्चइ-जहन्नाभिणिबोहियनाणीणं बेइंदियाणं अणंता पजवा पन्नत्ता !, गोयमा! जहमाभिणिबोहियणाणी बेइंदिए जहन्नाभिणिबोहियणाणिस्स बेइंदियस्स दवट्टयाए तुल्ले पएसट्टयाए तुल्ले ओगाहणट्ठयाए चउद्वाणवडिए ठिईए तिहाणवडिए वनगंधरसफासपञ्जवेहि छट्ठाणवडिए आभिणिबोहियणाणपज्जवेहिं तुल्ले सुयणाणपञ्जवेहिं छट्ठाणवडिए अचक्खुदंसणपज्जवेहिं छट्ठाणवडिए, एवं उक्कोसाभिणिबोहियणाणीवि, अजहन्नमणुकोसामिणिबोहियणाणीवि एवं चेव, नवरं सहाणे छट्ठाणवडिए, एवं सुयनाणीवि सुयअन्नाणीवि अचक्खुदंसणीवि, णवरं जत्थ णाणा तत्थ अन्नाणा नत्थि जत्थ अन्नाणा तत्थ णाणा नत्थि, जत्थ दंसणं तत्थ णाणावि अन्नाणावि, एवं तेइंदियाणवि, चउंरिदियाणवि एवं चेव णवरं चक्खुदंसणं अन्भहियं (मूत्रं०११४) जहन्नोगाहणगाणं भंते! पंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं केवड्या पजवा पनत्ता, गोयमा! अणंता पज्जवा पन्नत्ता, से केणद्वेणं भंते ! एवं बुच्चइ जहन्नोगाहणगाणं पंचिंदियतिरिक्खजोणियाणं अणंता पज्जवा पन्नता ?, गोयमा ! जहन्नोगाहणए पंचिंदियतिरिक्खजोणिए जहन्नोगाहणयस्स पंचिदियतिरि ॥१९॥ Jain Education International For Personal & Private Use Only www.jainelibrary.org
SR No.600240
Book TitlePragnapanopangamsutram Part 01
Original Sutra AuthorMalaygiri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1918
Total Pages752
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_pragyapana
File Size14 MB
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