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________________ Jain Education onal जहियं लद्धाउ पढमभिक्खाउ । तहियं वसुधाराओ सरीरमेत्तीओ बुट्ठाओ ॥ ३२ ॥ एएसिं चउव्वीसाए तित्थगराणं चवीसं चेइयरुक्खा होत्था, तंजहा- गग्गोहसत्तिवण्णे साले पियए पियंगु छत्ताहे । सिरिसे य णागरुक्खे माली य पिलंक्खुरुक्खे य ॥ ३३ ॥ तिंदुग पाडल जंबू आसत्ये खलु तदेव दहिवण्णे । गंदीरुक्खे तिलए अंबयरुक्खे असोगे य ॥ ३४ ॥ चंपय बउले य तहा वेडसरुक्खे य धायईरुक्खे । साले य वडमाणस्स चेइयरुक्खा जिणवराणं ॥ ३५ ॥ बत्तीसं धणुयाई चेइयरुक्खी य वद्धमाणस्स । णिच्चोउगो असोगो ओच्छण्णो सालरुक्खेणं ॥ ३६ ॥ तिण्णे व गाउआई चेइयरुक्खो जिणस्स उसमस्स । सेसाणं पुण रुक्खा सरीरओ बारसगुणा उ ॥ ३७ ॥ सच्छत्ता सपडागा सवेइया तोरणेहिं उववैया । सुरअसुरनरुलमहिया चेइयरुक्खा जिणवराणं ॥ ३८ ॥ एएसिं चउव्वीसाए तित्थगराणं चउव्वीसं पढमसीसा होत्या, तंजहा - 'पढमेत्थ उसभसेणे बीइए पुण होइ सीहसेणे य । चारू य वज्जणाभे चमरे तह सुव्वय विदन्भे ॥ ३९ ॥ दिष्णेय वराहे पुण आणंदे गोधुमे सुहम्मे य । मंदर जसे अरिट्टे चक्काह सयंभु कुंभे य ॥ ४० ॥ इंदे कुंभे य सुभे वरदत्ते दिण्ण इंदभूई य । उदितोदितकुलवंसा विसुवसा गुणेहि उववेया । तित्थष्पवत्तयाणं पढमा सिस्सा जिणवराणं ॥ ४१ ॥ एएसि णं चउवीसाए तित्थगराणं चउवीसं पढमसिस्सिणी होत्या, तंजहा - बंभी य फग्गु सामा अजिया कासवीरई सोमा । सुमणा वारुणि सुलसा धारणि धरणी य धरणिधरा ॥ ४२ ॥ पढम सिवासुयी तह अंजुया भावियप्पा य रक्खी य । बंधुवती पुप्फवती अज्जा अमिला य अहिया ॥ ४३ ॥ जक्खिणी पुप्फचूला य चंदणऽञ्ज य आहियाउ ॥ उदितो दियकुलवंसा विसुद्धवंसा गुणेहिं उववेया । तित्थप्पवत्तयाणं पढमा सिस्सी जिणवराणं ॥ ४४ ॥ गाहा । ( सूत्रं १५७ ) जंबुद्दीवे णं भारहे वासे इमीसे ओसप्पिणीए बारस चक्क - For Personal & Private Use Only inelibrary.org
SR No.600227
Book TitleSamvayangasutram
Original Sutra AuthorHaribhadrasuri
Author
PublisherAgamoday Samiti
Publication Year1918
Total Pages326
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_samvayang
File Size6 MB
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