SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 98
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ पाइअविन्नाणकहाण पुष्फवईए कहा-७७ ॥७०॥ च निवेइऊणं ते रायाइपुत्ते मोयावित्ता अविवाहियाए तीए जुओ नियं पुरि समागओ । चउत्थी कहा समत्ता । अह रायम्मि भित्तीए अंतरम्मि ठिए रायसहाए चित्त कुणंत चित्तकलागन्विर्ट्स एगं चित्तगरं अवरो चित्तगरो वएइ-हे मित्त ! किं चित्तकलाहकारं कुणेसि ?, किं चित्तकलारंजिओ राया तुम्ह अज्ज आणीयं अवाइणि रायकन्नं दाहिइ ?, इअ समायण्णित्ता दाणवीरो विक्कमाइच्चो तस्स चित्तकारिणो तं रायकण्णं दाऊणं तं चित्तगरं देसाहिवई कासी । एवं दाणिणो किंपि अदिजं न होज्जा । उबएसोविक्कमाइच्चभूवस्स, परदुक्खविणासिणो । कहं सोच्चा तहा तुम्हे, दाणे जएज्ज सव्वया ॥७६॥ एवं 'दाणिणो कि पि अदेयं न सिया' इह विक्कमाइच्चभूवइस्स कहा छहत्तरियमी समत्ता ॥७॥ -विक्कमचरित्ताओ। 'दइव्वमि पडिकूलम्भि दुक्खपरंपरा हवई' इह पुप्फवईए कहा सत्तहत्तरियमी ॥७७॥ दइव्वे पडिकूलम्मि, होइ दुक्खपरंपरा । इह पुप्फवईनार्य, भववेरग्गकारणं ॥७७॥ वाराणसीए नयरीए धणदत्तस्स सेद्विणो पुप्फबई नाम भज्जा आसी । तीए य कुबेरसेणो पुत्तो होत्था । एगया तत्थ नयरम्मि सिंहसूरस्स पल्लीवइस्स धाडी पडिया । तइया सा पुप्फबई पल्लीवइणा गहीया भज्जाभावेण य रक्खिया । अह धणदत्तो तीए सुद्धिं कुणंतो पल्लीमज्झे आगंतूणं पहाविअस्स घरम्मि ठाइत्ता स-पियं च तत्थ नच्चा पहावियभज्जं तीए समीवम्मि पेसित्था । सा बि नियप्पियं आगयं वियाणित्ता कालिगादेवीमंदिरम्मि चउद्दसीए राईए अहं आगच्छिस्सं त्ति संकेयं पहावियभज्जादुवारेण नियप्पियं जाणवेसी । 'ममई मह पीला नियट्टिया अस्थि' त्ति कालि ॥७ ॥ Jan Education Phar For Personal Private Use Only A w.jainerbrervom
SR No.600189
Book TitlePaia Vinnan Kaha Trayam Part 02
Original Sutra AuthorKastursuri, Chandrodayvijay
Author
PublisherVijay Nemi Vigyan Kastursuri Gyanmandir
Publication Year1971
Total Pages232
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size22 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy