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IN राय मंदिरकरायो ॥ दंडधज कलश लहकंत नंचा घणा, माहे जिनराजनो बिंब थाप्यो ॥देशाशा
पात्र अरिहंतने गमे धन प्रापियें, रतनमय पात्र अमृत सरिखो।नुक्तिनां मुक्तिनां सुखदिये नरनणी सुरगवी सुरमणि अधिक लेखो॥ देश ॥३॥रायदेवपाल गुणमाल थानक प्रथम, सुपरें सेवे घणु । नाव रूमे, मन वचन काय पूजे त्रिजगनाथने, पाप भवन्नवतणां खूब सूझे देश ॥४॥ चैत्य अरिहंतना गमगमें करया, जेह कैलास सरिखा बिराजे ॥ कीध प्रतिष्ट महोत्सवें केवली, हेममय बिंब अतिरूप गजे॥ देश ॥ ५ ॥ रत्नमाणिक्य गांगेयना आन्नरण, शोन्नता कीध मन चोर लीधो ॥ स्नात्र नत्सव करेनक्ति तेहना, सफल निजजन्म घणि नात कीधो ।
घाण नात कीधो ॥ देश valu ६ ॥ आणजिन नानी राण पाले सदा, वृद्धिजिनच्य नाना प्रकारें ॥ नक्ति
सामीतणी तेह करे अतिघणी, तीर्थयात्रा करे विधे सारे ॥ देशणा॥दोष जेहथी गया, दीनपाली दया, साधु गुणवंतनी करे सेवा ॥ अशन पानादि आहार थे ए षणी, मुक्तिना सुख तणी जासु al हेवा ॥ दे ॥ ७॥ प्रथम थानक जगन्नाथनी भक्तिशृं, राजनां काज गंमी आराधे ॥ बांधीन तीर्थ कर गोत्र देवपाल नृप, जेहथी पुण्यनी कोटि वाधे ॥ दे॥ ए॥ किणहीक अवसरे देवी पनोरमा, करण क्रीमा चली रायसाथे॥आगले चालतां एक नरपेखीयो, काष्ठनोनार जेणे ली माथे॥ दे० १०॥रागिनी तेहने देखी मूर्नालही, सीत नपचार करी चेत वाल्यो॥रायपूळे तसुं ए अयो तुज किशुं, प्रागन्नव ज्ञानथी में संन्नाल्यो॥ दे ॥ ११ ॥ नारि नाखे महाराय तुमे सांजलो एह पति माहरो काष्टधारी ॥पागले नव हुतो पण दरिडी दुखी, दुष्ट कर्ता करम काष्टहारी॥ देश
॥१२॥ Salu१॥ एह साथे गश् अन्यदारन्यमें, काष्ट लेवा नणी में निहाल्यो ॥ गिरिनदीने तटें बिंब जिन
रायनो, प्रश्रम शुचिनीरशुं ते पखाल्यो ॥ दे ॥१३॥ फूल हाथें धरी बिंब पूजा करी, अक्तिशुं में
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