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पढमं, तिम मण वय केवल डुगंमि ॥ ३२ ॥ मणवय उरला परिहा, र सुदुमि नव तेन मीसि सविधा || देसे सविधि डुगा, सकम्मुरल मीस प्रदखाए ॥ ३२ ॥ ति नाण नाण पण चन, दंसण बार जिप्रलकणु वर्जगा ॥ विष्णु मा नाण डु केवल, नव सुर तिरि निरय असु ॥ ३३॥ तस जो वे सुक्का, हार न र पििद सन्नि नवि सवे ॥ नय अरपण लेसा, कसाय दस केवल डुगूणा | ॥ ३४ ॥ चरिंदि सनि अना, उदंस इग बि ति यावरि प्रचकु ॥ ति अनाण दंसण डुगं, ना तिगि नवि मि डुगे || ३ || केवलडुगं निय डुगं, नव ति नाविणुं खइ प्रहखाए ॥ दंसण नाण तिगं दे, सि मीसि | अन्ना मी संतं ॥ ३६ ॥ मण नाण चरकु वजा, प्रणदारे तिन्नि स च नाणा ॥ चन नाण संजमो वस, म वेगे उदि दंसेा ॥ ३७ ॥ दो तेर तेर बारस, म | रोकमा डु च च वयणे ॥ चन डु पण तिन्नि काए, जिच्च गुण जोगोव
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