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कर्मयं ना॥ एएसु जुअलरूवा, पलिसंखंसान नरा ॥२१॥ जोयणदसमंस ll
प्रकरण. ॥४॥ तणू, पिहिकरंडाणमेसि चनसही॥ असणं चननबा, गुणसीदिण वच्चपाल
गया ॥२०॥पबिमदिसि सुध्यि लव,णसामिणो गोयमुत्ति श्गुदीवो ॥उन्न || INIवि जंबुलवणे, उसु रविदीवा य तेसिं च ॥॥ जग परुप्परि अंतरि, तह
विबर बार जोयणसहस्साएमेव य पुवदिसि,चंदचनक्कस्स चल दीवा ॥श्श्शा al एवंचिय बाहिर, दीवा अहह पुवपबिम ॥ लवणे उधायश्संग स सीणं रवीणं च ॥२३॥ एए दीवा जलुवरि, बदि जोयण सट्ठअहसीइ तदा॥ नागावि य चालीसा, मके पुण कोसगमेव ॥ २४ ॥ कुलगिरिपासायसमा, पासाया एसु नियनियपदणं ॥ तद लवणे जोसिया, दगफालिद जट्टलेसागा ॥ २५॥ इति श्री लवणसमुजाधिकारोक्तिीयः समाप्तः ॥ ७॥ ॥२॥ ॥४ ॥ जामुत्तरदीदेणं, दससयसमपिहुल पणसय जच्चेण ॥ नसुयारगिरि उगेणं, IN
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