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________________ से एगतिए गठिच्छे. से एगतिए उरब्भिय० से एगतिए सोयरिय० से एगइओ वागुरि० से एगइओ साउणि से एगइओ मच्छिय. से एगइओ गोधाय० से एगतिओ गोपाल. से एगतिओ सोवणि. से एगतिओ सोय. पडि. संतेगतिया मणुस्सा० से एगइओ केणवि० से एग० केण० आयाणेणं. से एगतिओ केणइ आदा० से एगतिओ केणइ आया. से एगइओ केणइ आदा० से एगइओ नो विति. से एगइओ णो० वि० गाहाव० से एगतिओ समणं. से जहानामए के इ० से जहानामए (केइ ) रुक्खे० से जहानामए अणगारा० से जहानामए समणो० सुर्य मे आउसं० इ० ख० आहार. सुर्य मे आ उसं० इ० ख० पञ्चखा० से किं तं असिन्निदिट्टते. ५५ ५५ Jain Education For Private & Personal Use Only jainerary.org
SR No.600140
Book TitleSuyagadanga Sutram Part-2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBuddhisagar Gani
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1962
Total Pages342
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_sutrakritang
File Size15 MB
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