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वन्दनप्रतिक्रमणावचूरिः
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प. पू. आगमवाचनादाता, युगप्रधान सदृश, आगममंदिरोना संस्थापक, ध्यानस्थस्वर्गत आगमोद्धारक आचार्यवर्य श्री आनन्दसागरसूरीश्वर जीए अमारी आ ' श्रेष्टिदेवचन्द लाल भाईजैन पुस्तकोद्धारसंस्था ' स्थापी हती. अने आ संस्था आगम-शास्त्रो वगेरे अनेक ग्रन्योने आ संस्थाना फंडना व्याजमांथी छपाया छे तेमज अत्यारे पण छपावे छे. तेवी प्रवृत्तिमां आ ग्रन्थनी पूर्वे अकसोमां एक न्यून (९९) अवा ग्रन्थो प्रकाशित करी आ अवचूरिने १००मा ग्रन्थाक्क तरीके प्रकाशित करे छे.
प. ता. आगमोद्धारक गुरुदेवश्रीना उपदेश अनुसार अवचूरिनुं कार्य शरू करतां प. पू. गुरुदेवश्रीनी आज्ञा मुजब अमे गुरुदेवश्रीनी सेवा करनार मुनिराज श्रीगुणसागरजी पासेथी आ ग्रन्थनी प्रेस कोपी मेळवी हती अने संपादन करवा मुनिराज श्रीकंचनविजयजी तथा क्षेमंकरसागरजीने विज्ञप्ति करी. तेथी तेओश्रीए अमारा आ ग्रन्थनुं प. ता. आगमोद्धारकगुरुदेवश्रीना अनन्य पट्टधर, श्रुतस्थविर आचार्य श्रीमाणिक्यसागरसूरिजीने एक बखतनुं प्रूफ बताववा पूर्वक आ ग्रन्थनुं संपादन करी आप्युं छे. अने ग्रन्थने शणगारवा माटे सूत्रो वगेरेनां छ परिशिष्टो आप्यां छे. मदद करी छे तेओश्रीना अमे ऋणी छीए. आत्मार्थी जीवो अमारा आ ग्रन्थनो उपयोग
अमारा आ प्रकाशनमां जेओए अमने करशे एज अभिलाषा.
ता. क. - शेठ सावेरचंद खुशालचंद झवेरीनो स्वर्गवास सं. २००८मां थयो होवाथी तेमनी खाली पडेली जग्याए श्रीकेसरीचंद हीराचंद झवेरीनी नीमणुक करवामां आवी छे, पण टाइटल पेइज वगेरे ते पहेलां छपाइ गयां हतां तेथी तेमनुं नाम मूकी शक्या नथी.
वीरजन्मवाचनमहिमा दिवस
लि. भवदीय,
भाद्रपद शुक्ला प्रतिपदा सं. २०१०
मोतीचंद मगनभाई चोकसी वगेरे ट्रस्टीओ
मुंबई
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मुखबन्धः
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