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________________ पन्या ॥श्रीभरते- बाहुबलिवृत्तिनो बीजो भाग बहार पाडवामां आवे छे. श्रीशुभशीलगणिजी विक्रमनी १६ मी सदीना प्रारम्भमा विद्यमान किशित श्वरवृत्तिःलाहता तेम आ अने तेओश्रीना अन्य अन्थो उपरथी जाणी शकाय छे. प्रतिक्रमणनी अंदर हमेशां कहेवामां आवे छे ते श्रीभरहेसरबाहुबलि नामनी महासता अने महासतीओनी सज्झाय उपरथी आ भरतेश्वरबाहुबलिकथाकोश साधुसाध्वीना बे जूदा अधिकारोथी विभूषित करी रचवामां आव्यो छे. भरहेसरबाहुबलिवृत्तिमा गुंथवामां आवेली गद्यपद्यात्मक कथाओ, जो के सामान्य वाचको माटे सुलालित्ययुक्त सरल, रसदायक, स्पष्ट अने बोधक होवाथी घणी उत्तम छे, पण शास्त्रनी अपेक्षाए हकीकतोमा पाठभेदो घणा छे. कथाकारे, पृथक पृथक विषयदृष्टान्तोमा प्रासङ्गीक लोकोक्तिओ पण घणां सारा प्रमाणमा अर्की छे. कथाकारना ते समयमा विशेष प्रचलित हशे तेवा घणा श्लोकोमां तो पदोना थोडा थोडा पाठो लखीने त अधूरा मूकी दीधा छ, जे अन्यस्थानेथी प्राप्त न थवाथी अधूराज राख्या छे. मूळ सज्झायना कर्ता अने कर्यानो संवत् समय जाणवामा आव्यो नथी. पण, लींबडीना शेठ आणंदजी कल्याणजीना भंडारमा वि. सं. १५१५ नी लखायेली सज्झायनी प्रत मोजूद होवाथी, तेमज, श्रीशुभशीलगणिजी विक्रमनी १५ मी सदीना अन्त अने १६ भी सदीना प्रारम्भमां थयेला होवाथी, ए सज्झाय ओछामा ओछी विक्रमनी १३ मी शताब्दीमा रचाई होवी जोईये तेवू अनुमास थाय छे. भरहेसरबाहुबलीसज्झाय प्रतिक्रमणमा कहेवानी प्रथा घणी पाछलथी दाखल थयेली, छतां, पञ्चवस्तुनी अंदर, "स्वाध्याय पछी स्वाध्यायथी थाकेला मुनिओए, सुदर्शन शेठ आदि महापुरुषोनी कथाओ करवी” एम सूचवेलुं छे तेने अनुसरतुं छे. श्रीशुभशीलजी पूर्वेनी, आ सज्झाय उपर कोई अन्य वृत्ति होवानुं जाणमां नथी, तेमज होवानो सम्भव पण नथी.. Jain Education a l For Private & Personal Use Only hainelibrary.org
SR No.600112
Book TitleBharateshwar Bahubali Vrutti Part_2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShubhshil Gani
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1937
Total Pages398
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size19 MB
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