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प्रशमतिः हारि.वृत्तिः
| दे.ला.कु. वंशवेल अनुलेख
॥४०॥
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शेठ देवचंदना कुटुम्बना मूळ पुरुष शेठ फूलचंद शा० नी गोत्र 'घृत-गुड' छे. गोठ(थ)नी ओळख मारवाडी भाषामां धीगुडनी छे जे सुरतमा गुजराती भाषामां घीगोळनी गोत्रज तरीके ओळखाय छे.
सुरतनी वीशा ओशवाळ कोमनो धंधो बहोळा भागे मोती अने झवेरातनो छे. अने तेथी ए आखी कोम झबेरी कोम तरीके प्रसिद्धि पामेली छ. मोती | अने झवेरातनो धंधो आ कोमनो परापूर्वथी चाली आवतो वंशउतार धंधो छे. खंभात, अमदावाद, घोषा, मारवाड वगेरे जूदे जूदे स्थळेथी आवीने आ कोम | सुरतमा एकत्र थई शकी ते झवेरातना धंधाने ज आभारी छे. खरं कहिये तो खंभात, अने घोघा बंदरोथी तेमज अमदावाद, अने मारवाडना जूदा जूदा शहेरोमांथी झवेरातनो धंधो करनारा ज वीशा ओशवाळो मोटा भागे सुरत बंदरमा आवीने एकत्र स्थिर थई शक्यां छे. ज्यारे बीजो धंधो करनारा वीशा ओशवाळ ज्ञातिना जैनो पण सुरतमा पूर्व अल्प प्रमाणमां कईक आव्या हता खरा पण झवेरीयोनी माफक एकत्र थई शक्यां के सुरतमा स्थिर थई शक्यां नहोतां. आज झवेरातना वेपारने लीधे-कारणथी सुरतनी आसीये वीशा ओशवाळ जैन कोम झवेरी कोम तरीके ओळखाती आवी छे. जो के हमणां मोतीना ध्यापारनी अतिशय मंदताना कारणे अन्य धंधा तरफ पण फेटलांको वळेला छे.
सुरतनी वीशा ओशवाळ कोमः ए तपा, खरतर, अंचल, सागर, लोढीपोसाल वगेरे पृथक् पृथक् गच्छोना श्रावकोवडे बनेली बहुधा श्वेतांबर मूर्तिपूजक न्यात छे. __ थोडांक वर्षीथी न्यातमां तेरापंथी पंथनो पगरव जणायाथी न्यातनी आशरे सत्तरसो माणसोनी वस्तीमाथी लगभग साडीतेरसो आबालवृद्ध स्त्रीपुरुषो, “श्रीवीशा
ओशवाल जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजकन्याति-सुरत" ए नामथी नवी न्यातनी स्थापना करी प्रतिज्ञापत्रवडे एमां संगठित थया छे. __शेठ देवचंदना कुटुंबनी वंशवेल, एटले म्हारा पूर्वपुरुषोनी मात्र नामावली अने शुभकार्यादिनी यादि जेवी धर्मवही दर्शाववामां आवी छे, ए फक्त म्हारा कुटुंबना गौरव या वडाई खातर नहि, पण,
(क) जेवी रीते कविकुलभूषण संघवी, श्रावक ऋषभदासे पोताना रासाओ आदि काव्योमा पोतानी अने पोताना पूर्वजोना शुभ कार्योनी यादि, जनताने पाए ए प्रकारे शुभकार्योमां प्रेरावा माटे दोरी छे, तेवीज रीते तेवाज मनोरथोथी अत्रे में पण आपवा प्रयत्न कयों छे. के जे उपरथी अन्य सहधर्मी बंधुओ पोतपोतानी
शारीरीकमानसिकआर्थिक शक्तियो अने भावना प्रमाणे ते ते शक्तियोनो व्यय करी शुभ उपाजें अने अन्योने ते मार्ग प्रयत्नशील बनावे.
॥४०॥
सर
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