SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 20
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ क्षमा रत्नीयावर्युपेता श्री. पिण्डनिर्युक्तिः । ॥ ९ ॥ Jain Education Inte केटीक वखत शारीरिक कारणोना अंगे संपादनकार्य धीरुं चाले, तो केटलीक वखत प्रेस एवी अगवडता ऊभी करे के कार्य तद्दन ठंडुंज थई जाय, एथी पण संपादनकार्यमां ढीलाश पडे छे. अमारा संपादन कार्यमा जेणे जेणे मदद करी छे ते सर्वने अमे अत्रे याद करीए छीए. शेठ देवचंद लालभाई जैन पुस्तकोद्धारकफंडना १०५ मा क्रमांकवाला आ प्रथनुं संपादन जे अमने मत्र्युं छे ते मारा ज्ञानना क्षयोपशममां कारणभूत थाय छे. विद्वदुजनो अमारा संपादनमां जे कांई क्षति रही होय तेने मारा ज्ञानमित्रे करी आपला शुद्धिपत्रकथी शुद्ध करी वांचे अने ते उपरान्तनी क्षतिओ अमने जणावे, ए ज अभ्यर्थना. शुद्धिपत्रक परि० ८ सुधी ज आप्युं छे. साधु मुनिराजो पिण्डने - आहारने लगता आ ग्रंथनो सबहुमान उपयोग करशे एम कही हुं विरमुं कुं. आगमोद्धारक उपसंपदाप्राप्त मुनिकंचनविजय. सं. २०१४ पोष सुद १५ जैन उपाश्रय, लुणावाडा ( पंचमहाल ) } कपडवंजथी २० माइल दूर खलाडी मुकामे सं. २०११ ना चैत्र व. ० ) )नी काळी राते ११ वाम्याना सुमारे जेरी जानवरना दंशथी, सर्व जीवोने पोताना हाथे खमावी, नमस्कारमहामंत्रने सांभळतां हुं जाउं छं एम बोली, समाधिपूर्वक आ कायानी साथेना संबंधथी छुटा थया - काळधर्म पाम्या. आ रीते अमारी संपादकनी जोडी तूटी. एमनी जीवनझरमर अने तेमना संपादन करेला ग्रंथोनी यादी मारी संपादित श्रीसिद्धिगिरियात्राविधि नामनी पुस्तिकामां आपवामां आवी छे. For Private & Personal Use Only संपादकीय निवेदन | ॥ ९ ॥ www.jainelibrary.org
SR No.600106
Book TitlePind Niryukti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManekyashekharsuri, Kanchanvijay
PublisherDevchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
Publication Year1968
Total Pages396
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_pindniryukti
File Size17 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy