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श्रीजीवाजीवाभि०
मलयगिरीयावृत्तिः
॥ ३३४ ॥
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लोगंमि । सत्तय सता अणूणा तारागणकोडकोडीणं ॥ ३ ॥ सोनं सोनेंसु वा ३ ॥ एसो तारापिंडो सवसमासेण मणुयलोगंमि । बहिया पुण ताराओ जिणेहिं भणिया असंखेज्जा ॥ १ ॥ एवइयं तारगं जं भणियं माणुसंमि लोगंमि । चारं कलेवुया पुष्कसंठियं जोइसं चरइ ||२|| रविससिगहनक्खत्ता एवइया आहिया मणुयलोए । जेसिं नामागोयं न पागया पन्नबेर्हिति ॥ ३ ॥ छाडी पिडगाई चंद्राचा मणुयलोगंमि । दो चंदा दो सूरा य होंति एक्कए पिडए ॥ ४ ॥ छावट्टीपिडगाई नक्खत्ताणं तु मणुयलोगंमि । छप्पन्नं नक्खत्ता य होति एकेक पिडए ॥ ५ ॥ छावट्टी पिडगाई महागहाणं तु मणुयलोगंमि । छावत्तरं गहसयं च होइ एक्कए पिडए ॥ ६॥ चत्तारि य पंतीओ चंदाइचाण मणुयलोगंमि । छावट्ठिय छावट्टिय होह य एक्केकया पंती ॥ ७ ॥ aur पंतीओ नक्arाणं तु मणुयलोगंमि । छावट्ठी छावट्ठी हवइ य एक्केकया पंती ॥ ८ ॥ छावत्तरं गहाणं पंतिसयं होइ मणुयलोगंमि । छावट्ठी छावट्टी य होति एक्केक्किया पंती ॥ ९ ॥ ते मेरु परियडन्ता पयाहिणावत्तमंडला सव्वे | अणवट्ठियजोगेहिं चंदा सूरा गहगणा य ॥ १० ॥ नक्खन्ततारगाणं अवट्टिया मंडला मुणेयच्वा । तेऽविय पयाहिणावत्तमेव मेरुं अणुचरंति ॥ ११ ॥ रणियरदिणयराणं उड्ढे व अहे व संकमो नत्थि । मंडलसंकमणं पुण अभितरबाहिरं तिरिए ॥ १२ ॥ स्यणियरदिणयराणं नक्खत्ताणं महग्गहाणं च । चारविसेसेण भवे सुहदुक्खविही
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३ प्रतिपत्तौ समयक्षे
त्राधि०
उद्देशः २
सू० १७७
॥ ३३४ ॥
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