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________________ सिरिसंतिनार ‘एगो चेव उवाओ एत्थं विजइ अणण्णस्तरिछो' । भणइ निवो 'केरिसओ ?' ते वि पयंपंति 'सुण सामि ! ॥५९० ॥ ४४८१ ॥ कुह सिरिसुंदरी नियधूयाए विघाहसामग्गिं । पेसह निमंतयाइं असेसनरनाहवग्गस्स ॥५९१॥४४८२॥ एत्तो य दाहिणाए दिसाए नयरस्स जमहरं कुणह। अचंतमइविसालं पच्चक्खं जमहरं चेव ॥ ५९२॥४४८३॥ पेसह य वच्छ्रायं जमरायनिमंतयं तहिं तत्तये । एवं केएण नियमा जाही जमरायपाहुणओ' ॥ ५९३ ॥४४८४॥ भाइ निवो 'तुम्हाणं अहो ! अहो ! सोहणा इमा बुद्धी । ता कीरउ एवं चिय मा एत्थत्थे विलंबेह' ॥ ५९४ ॥ ४४८५ तेहि बिनयरस्संतो विवाहसामग्गियं विहेऊण । आढत्ता नयरबहिं सामग्गी जमहरस्सावि ॥ ५९५ ।।४४८६ ॥ अवि य खणिय खड्ड अच्चतमहाली, सव्वेसु वि अंगेसु विसाली, पक्खित्तई खाइरवरकटुई, अण्णाइं वि इंधणई विसि हुई, पक्खित्ता तिलभूरि सुसोहण, पक्खित्ता तुसनियर विरोहण, पक्खित्तई कोवियहं धन्नई, अन्नाई वि खित्ताइं अगन्नई, परिखित्तु अग्गिविहसंतउ, नज्जइ नाइ कयंतु हसंतउ, पसरिउ धगधगंतु तर्हि खड्डूहिं, नाइ कयंतु जणोहह मडुहिं, जं विज्झाइ न छम्मासेण वि. तं जमहरु किउ मंतिजणेण वि, १. पेसेह बच्छ° त्रु० ।। २. कए व नि° पा० का० ॥। ३. निसदुई पा० । नसिदुई त्रु० का० ॥ सूरस्स रायस्स कहाणय ५१७
SR No.600084
Book TitleSiri Santinaha Chariyam
Original Sutra AuthorDevchandasuri
AuthorDharmadhurandharsuri
PublisherB L Institute of Indology
Publication Year1996
Total Pages1016
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size17 MB
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